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Pakur (Jaydev Kumar) : गांव के विकास का फैसला अब गांव के लोग ही ज्यादा मजबूती से कर सकेंगे। सरकारी योजनाओं से लेकर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्थानीय जरूरतों से जुड़े कई अहम फैसलों में ग्राम सभाओं की भूमिका पहले से ज्यादा मजबूत होने जा रही है। यही संदेश लेकर शनिवार को पाकुड़ के रवींद्र भवन में “पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार) झारखंड नियमावली, 2025” पर जिला स्तरीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। कार्यक्रम सिर्फ एक सरकारी बैठक नहीं था, बल्कि यह इस बात पर चर्चा का मंच बना कि आखिर गांव की सरकार को और मजबूत कैसे बनाया जाए। दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए इस सम्मेलन में जनप्रतिनिधि, ग्राम प्रधान, पंचायत प्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न विभागों के अधिकारी एक साथ बैठे। सबका फोकस एक ही था कि पेसा नियमावली का लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक कैसे पहुंचे और ग्राम सभाएं अपने अधिकारों का सही तरीके से इस्तेमाल कर सकें।

“ग्राम सभा जितनी मजबूत होगी, विकास उतना ही जमीन पर दिखेगा”
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उप विकास आयुक्त अरविंद कुमार लाल ने अपने संबोधन में कहा कि पेसा नियमावली 2025 केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके अधिकारों से जोड़ने का मजबूत माध्यम है। उन्होंने कहा कि ग्राम सभाओं को अधिकार संपन्न और स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने में पेसा की बेहद अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि अब विकास योजनाओं की योजना बनाने से लेकर उनके क्रियान्वयन तक ग्राम सभाओं की भागीदारी और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। गांव के लोग अपनी जरूरतों के मुताबिक फैसले लेने में अधिक सक्षम होंगे। स्थानीय संसाधनों का संरक्षण, उनके उपयोग और विकास से जुड़े विषयों पर भी ग्राम सभा की राय को प्राथमिकता मिलेगी।
डीडीसी ने कहा कि झारखंड के छोटानागपुर और संथाल परगना की पारंपरिक ग्राम सभा व्यवस्था वर्षों से सामाजिक जीवन का आधार रही है। पेसा नियमावली इस परंपरा को और मजबूत करने का काम करेगी। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि अनुसूचित क्षेत्रों में संचालित हर विकास और जनकल्याणकारी योजना में पेसा नियमावली के प्रावधानों का पूरी गंभीरता से पालन सुनिश्चित किया जाए।
गांव की भागीदारी बढ़ेगी, फैसलों में आएगी पारदर्शिता
कार्यक्रम की शुरुआत में जिला पंचायती राज पदाधिकारी प्रीतिलता मुर्मू ने कहा कि पेसा नियमावली का सबसे बड़ा उद्देश्य गांव के लोगों को विकास प्रक्रिया का केंद्र बनाना है। उन्होंने बताया कि इससे ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार मिलेंगे और योजनाओं में लोगों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित होगी। इससे निर्णय प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।
उन्होंने कहा कि जब गांव के लोग खुद अपने गांव के विकास से जुड़े फैसलों में शामिल होंगे, तब योजनाएं भी स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बनेंगी और उनका लाभ अधिक प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचेगा।

प्रेजेंटेशन के जरिए आसान भाषा में समझाए गए पेसा के प्रावधान
कॉन्फ्रेंस में पंचायती राज विभाग के पेसा राज्य फैसिलिटेटर सज्जाद मजीद ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से नियमावली के हर महत्वपूर्ण पहलू को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि पेसा कानून क्यों बनाया गया, ग्राम सभा के अधिकार क्या हैं, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में उसकी क्या भूमिका होगी और स्थानीय परंपराओं को किस तरह संरक्षण मिलेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि समुदाय आधारित सुशासन की अवधारणा तभी सफल होगी, जब ग्राम सभाएं अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को पूरी तरह समझेंगी और उनका प्रभावी उपयोग करेंगी।

प्रतिनिधियों ने पूछे सवाल, अधिकारियों ने दिए जवाब
सम्मेलन का सबसे अहम हिस्सा संवादात्मक सत्र रहा। ग्राम प्रधानों, पंचायत प्रतिनिधियों और अन्य प्रतिभागियों ने पेसा नियमावली को लेकर अपनी शंकाएं खुलकर रखीं। कई सवाल ग्राम सभा की शक्तियों, योजनाओं के संचालन और नियमों के पालन से जुड़े थे।
विशेषज्ञों और अधिकारियों ने एक-एक सवाल का विस्तार से जवाब दिया। इससे प्रतिनिधियों को नियमावली की व्यवहारिक जानकारी मिली और यह भी समझ आया कि इसे गांवों में किस तरह लागू किया जाएगा।

गांवों तक पहुंचे पेसा की असली ताकत
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने भी माना कि पेसा नियमावली तभी सफल होगी, जब इसकी जानकारी हर ग्राम सभा और हर पंचायत तक पहुंचे। इसलिए आने वाले दिनों में जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि लोग अपने अधिकारों को समझ सकें और उनका सही इस्तेमाल कर सकें।
सम्मेलन में अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, ग्राम प्रधान, पंचायत प्रतिनिधि, डीपीएम पंचायती राज सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
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