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Ranchi : रांची का मौसम बुधवार को थोड़ा ठंडा जरूर था, लेकिन गुरूनानक होम और चेशायर होम बरियातू का माहौल किसी त्योहार से कम नहीं था। अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के मौके पर यहां कुछ ऐसा माहौल बना, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भीतर तक छू लिया। वजह थीं वे बच्चे, जो अपनी सीमाओं के बावजूद दुनिया को बताना चाहते थे कि सपने देखने और आगे बढ़ने पर किसी का हक कम नहीं होता।
बच्चों की मुस्कान ने बनाया दिन खास
सुबह से ही दोनों होमों में हलचल थी। कुछ बच्चे अपना गीत रिहर्सल कर रहे थे, तो कुछ वाद-विवाद की तैयारी कर रहे थे। चेहरे पर थोड़ी घबराहट थी, लेकिन उससे ज्यादा उत्साह। जैसे ही कार्यक्रम शुरू हुआ, बच्चियों की आवाज़ों में संगीत गूंजा और कमरे का माहौल बदल गया। उनकी प्रस्तुति देखकर कई लोगों की आंखों में चमक आ गई। यह चमक सिर्फ गर्व की नहीं थी, बल्कि उस जज़्बे की थी, जो इन बच्चों को हर दिन मजबूत बनाता है।
कानून की जानकारी के बीच संवेदना का संदेश
कार्यक्रम में आए एलएडीसीएस डिप्टी राजेश कुमार सिन्हा ने जब आरपीडब्ल्यूडी एक्ट 2016 की जानकारी दी, तो सिर्फ नियम नहीं बताए, बल्कि हर बात के साथ यह भी समझाया कि समाज की भूमिका कितनी जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी दिव्यांगजन को बराबर अधिकार मिलना सिर्फ सरकारी कागजों का हिस्सा नहीं, बल्कि हम सबकी जिम्मेदारी है। उनकी बातों में एक झलक साफ दिख रही थी कि यह कार्यक्रम सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि समझ और संवेदना बढ़ाने का प्रयास है।

योजनाओं की मदद तक पहुंचाने का वादा
एलएडीसी सहायक पंकज कुमार शर्मा ने जब बताया कि झालसा और डालसा लगातार दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं से जोड़ते हैं, तो बच्चों के माता-पिता के चेहरों पर उम्मीद नजर आई। कई अभिभावक अक्सर यह नहीं जानते कि वे किन योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं। शर्मा की बातों ने उन्हें भरोसा दिया कि उनके बच्चे सिर्फ आज के कार्यक्रम का हिस्सा नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में भी मदद के दायरे में रहेंगे।
सवाल-जवाब में चमका बच्चों का आत्मविश्वास
चेशायर होम में आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता सबसे जीवंत हिस्सा थी। बच्चे हाथ उठाकर सवालों के जवाब दे रहे थे। उनके चेहरे पर एक जीतने का भाव था, जैसे वे यह कह रहे हों कि उनकी दुनिया सीमित नहीं, बल्कि नई संभावनाओं से भरी है। वाद-विवाद में एक बच्चे ने कहा, “हम किसी से कम नहीं, बस थोड़ा साथ चाहिए।”
अंत में संवेदना, सम्मान और सीख एक साथ
कार्यक्रम के आखिर में पीएलवी टीम ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कामों की जानकारी दी। कई बच्चे उत्सुकता से सुन रहे थे। शायद इसलिए क्योंकि उन्हें लगा कि उनके हक और अधिकारों की रक्षा में कोई खड़ा है। दिन खत्म हुआ, पर जो तस्वीरें पीछे छूट गईं, वे पूरे दिन से ज्यादा गहरी थीं। एक बच्ची अपने छोटे से ट्रॉफी को थामे बार-बार मुस्कुरा रही थी। एक अन्य बच्चा धीरे-धीरे चलते हुए भी सबको धन्यवाद कह रहा था। यह कार्यक्रम न्यायामूर्ति और झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष सुजित नारायण प्रसाद के निर्देश पर आयोजित हुआ। आयोजन की देखरेख न्यायायुक्त रांची अनिल कुमार मिश्रा-1 ने की।

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