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Home » उम्मीद की पहली ढुलाई, NTPC की नई परियोजना से बदलेगी हजारीबाग की तस्वीर
झारखंड

उम्मीद की पहली ढुलाई, NTPC की नई परियोजना से बदलेगी हजारीबाग की तस्वीर

December 10, 2025No Comments4 Mins Read
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Hazaribagh: हजारीबाग की पहाड़ी हवा बुधवार की सुबह कुछ अलग थी। पकरी बरवाडीह नॉर्थ वेस्ट परियोजना के माइन व्यू प्वाइंट पर खड़े कर्मचारियों की आंखों में एक उम्मीद थी। जैसे ही NTPC माइनिंग लिमिटेड द्वारा कोयले से भरा पहला ट्रक हरी झंडी पाकर आगे बढ़ा, वहाँ मौजूद हर चेहरे पर यह भरोसा दिखा कि आने वाले दिनों में उनके घर-परिवार की रोशनी और मजबूत होगी।

बदलाव की शुरुआत में लोगों की भागीदारी

इस मौके पर बड़ी कंपनियों के अधिकारी वर्चुअली जुड़ रहे थे, पर असली उत्साह उन स्थानीय कर्मचारियों और मजदूरों में था, जिन्होंने इस परियोजना को जमीन से आकार दिया। पकरी बरवाडीह इलाके के खदान में तकनीकी सहायक के रूप में काम कर रहे एक शख्स बताते हैं, “आज तो ऐसा लग रहा है जैसे हमारा ही बच्चा पहली बार चल पड़ा हो। इतने दिनों की मेहनत के बाद जो शुरुआत हुई है, उससे गांव में रोजगार भी बढ़ेगा और हमारे बच्चों की पढ़ाई भी ठीक से हो पाएगी।”

49 साल की परियोजना, 49 साल की उम्मीद

पीबी नॉर्थवेस्ट परियोजना सिर्फ एक खदान नहीं है। यह 49 साल तक चलने वाली ऐसी गतिविधि है जो पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था को बदल सकती है। यहां मौजूद खनन योग्य भंडार और 3 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष की उत्पादन क्षमता क्षेत्र में स्थायी रोजगार का आधार बन सकती है।

पास के केरेडारी गांव की सीता देवी कहती हैं, “पहले हमारे यहां काम के लिए लोग बाहर थे। अब यहीं काम मिलेगा तो घर-परिवार भी साथ रहेगा और गाँव में रौनक भी बढ़ेगी।”

परियोजना से स्थानीय विकास को गति

हजारीबाग के इन ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से विकास की जरूरत महसूस की जाती रही है। सड़कें, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं इन सबमें अभी भी सुधार की जगह थी। NTPC की परियोजना से इन क्षेत्रों में न केवल रोज़गार बढ़ेगा, बल्कि कंपनियों द्वारा किए जाने वाले सामाजिक कार्य स्कूलों का निर्माण, स्वास्थ्य शिविर, कौशल प्रशिक्षण सीधे स्थानीय परिवारों को प्रभावित करेंगे। यही वजह है कि कई लोग इस शुरुआत को सिर्फ एक परियोजना नहीं, बल्कि अपनी नई सुबह मानते हैं।

ऊर्जा सुरक्षा और स्थानीय जीवन का मेल

देश भर में बिजली की जरूरत लगातार बढ़ रही है, और ऐसे समय में यह परियोजना राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है।
लेकिन हजारीबाग के ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ बिजली उत्पादन भर की कहानी नहीं है। यह कहानी है उस किसान की, जिसके बेटे को अब बाहर नौकरी की तलाश में नहीं जाना पड़ेगा। उस महिला की, जो अपने गाँव में ही कौशल प्रशिक्षण लेकर नई पहचान बना सकेगी। और उस छात्र की, जिसकी स्कूली दूरी अब कम हो जाएगी क्योंकि क्षेत्र में बेहतर सड़कें और सुविधाएं बनेंगी।

पहले ट्रक के साथ बढ़ा विश्वास

जब पहला ट्रक धीरे-धीरे ढलान से नीचे उतर रहा था, लोगों की आंखों में चमक थी। उनके लिए यह किसी रस्मी झंडी का कार्यक्रम नहीं था।
उनके लिए यह आश्वासन था कि इंतजार का समय खत्म हुआ, और अब विकास उनकी दहलीज़ तक आने वाला है।

स्थानीय निवासियों की उम्मीदें

बहुत से युवाओं ने कहा कि प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तो वे अपने गांव-घर में रहकर ही भविष्य बना सकेंगे। हजारीबाग के एक युवा बताते हैं, “हम जैसे युवाओं के लिए यह बड़ा मौका है। पहले खनन परियोजनाएं शुरू होने में सालों लगते थे, लेकिन अब गति बढ़ी है। इससे रोजगार भी स्थिर होगा।”

एक ट्रक, कई ज़िंदगियों की दिशा

यह शुरुआत सिर्फ कोयला प्रेषण की नहीं थी। यह कई परिवारों के सपनों की शुरुआत थी। कई बच्चों की पढ़ाई का भरोसा थी। और कई घरों की आर्थिक मजबूती की नींव थी। हजारीबाग के लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में यह परियोजना उनके जीवन की दिशा बदलेगी।
और शायद इसलिए, जब पहला ट्रक आगे बढ़ा, तो उसके पीछे सिर्फ धुवां नहीं उठा… उठी तो बस एक नई उम्मीद।

इसे भी पढ़ें : मासूम आवाजों को गजब का हिम्मत दे गया NTPC का यह सेमिनार

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