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Chatra : टंडवा के डीएवी पब्लिक स्कूल, NTPC नॉर्थ करणपुरा का शनिवार कुछ अलग ही था। सामान्य क्लासरूम माहौल से हटकर बच्चों की आंखों में उत्सुकता, शिक्षकों के चेहरे पर जिम्मेदारी और मंच पर बैठे विशेषज्ञों के सामने एक गंभीर मुद्दा… बच्चों की सुरक्षा और अधिकार था
दीप जला… और जागरूकता का रास्ता रोशन हुआ
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। जैसे ही मुख्य अतिथि अजय कुमार, विधि अधिकारी (NTPC), चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी के सदस्य और प्रधानाचार्य पुष्पा कुमार झा ने दीप जलाया, पूरा सभागार मानो यह संदेश दे रहा था कि “ज्ञान की रोशनी से ही बच्चे सुरक्षित रह सकते हैं।” प्रधानाचार्य ने मुख्य अतिथि को पौधा और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।

एक-एक शब्द जैसे जीवन भर का सबक
गायत्री मंत्र की गूंज के बाद सेमिनार शुरु हुआ। दर्जनों छोटे-छोटे चेहरे मंच की ओर टकटकी लगाए बैठे थे। अजय कुमार ने सरल भाषा में बच्चों से बात की। उन्होंने कहा कि अनुशासन, संविधान की समझ और अपने अधिकारों की जानकारी ही आपको मजबूत बनाती है। हर बच्चा शायद पहली बार समझ रहा था कि अधिकार केवल किताबों के शब्द नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा की ढाल है। उन्हें बताया गया कि पोक्सो एक्ट 2012 क्या है, किन हालात में बच्चे ‘ना’ कह सकते हैं, अगर कोई गलत करे तो किससे मदद लेनी चाहिए, और समाज में उनकी सुरक्षा को लेकर क्या कानून बने हैं।
कुछ बच्चे सवाल पूछने में हिचक रहे थे, लेकिन जब एक बच्ची ने हिम्मत करके पूछा… “सर, अगर कोई हमें डरा कर गलत करे तो क्या करें?” तो पूरा माहौल अचानक गम्भीर हो गया। अजय कुमार का जवाब बच्चों के दिल को छू गया। उन्होंने कहा कि डरकर चुप मत रहो। आपकी आवाज ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।
शांति पाठ के साथ खत्म हुआ सेमिनार
अंत में शांति पाठ हुआ, लेकिन वास्तव में शांति उस एहसास से आई कि जिस समाज में हम बच्चों के भविष्य की बात करते हैं, वहीं अब उनकी सुरक्षा पर भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भूमिका पूरे कार्यक्रम में साफ दिख रही थी। हर कोई अपने-अपने तरीके से यह सुनिश्चित कर रहा था कि बच्चों तक सही संदेश पहुंचे। सेमिनार खत्म होने के बाद भी कई बच्चे आपस में चर्चा कर रहे थे कि अब हमें यह पता है कि कौन-सी बात गलत है। अगर कोई गलत करेगा, तो हम मम्मी-पापा या मैडम को बताएंगे।

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