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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ में शनिवार को जमाई षष्ठी के मौके पर ससुरालों में अलग ही रौनक देखने को मिली। सुबह से ही घरों में तैयारियों का सिलसिला शुरू हो गया था। यह पर्व सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि दामाद और ससुराल के रिश्ते को मजबूत करने वाला खास अवसर माना जाता है। इस बार 20 जून 2026 को यह त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाया गया।
दामाद के स्वागत में सजी ससुरालें
बंगाली समाज में जमाई षष्ठी का खास महत्व होता है। इस दिन दामाद को घर के विशेष सदस्य की तरह सम्मान दिया जाता है। परंपरा के अनुसार दामाद अपनी पत्नी के साथ ससुराल पहुंचते हैं, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया जाता है। सास ने दामाद के माथे पर तिलक लगाया और कलाई पर पीला धागा बांधा। इसके साथ ही उनके अच्छे स्वास्थ्य, सुख और लंबी उम्र की कामना की गई। घर के बाकी सदस्य भी इस मौके पर मौजूद रहे और माहौल को पारिवारिक अपनापन से भर दिया।
पारंपरिक थाली बनी खास आकर्षण
जमाई षष्ठी की सबसे खास बात दामाद के लिए तैयार की जाने वाली विशेष थाली होती है। इस बार भी घरों में अलग-अलग तरह के व्यंजन बनाए गए। थाली में भात, दाल, तली हुई सब्जियां और मछली के कई प्रकार के पकवान शामिल रहे। इसके अलावा कोशा मांगशो, मिठाइयां और मौसमी फल भी थाली में सजाए गए। परिवार के लोगों ने मिलकर यह थाली तैयार की और दामाद को प्रेम के साथ परोसी।
घर में जुटा पूरा परिवार, बढ़ा अपनापन
इस मौके पर घर के सभी सदस्य एक साथ बैठे और भोजन के साथ बातचीत भी हुई। लोगों का कहना है कि यह परंपरा सिर्फ खाने-पीने का अवसर नहीं है, बल्कि रिश्तों में अपनापन और समझ बढ़ाने का भी जरिया है। पूरे दिन घरों में हंसी-खुशी का माहौल बना रहा। जमाई षष्ठी को लेकर बाजारों में भी खास चहल-पहल रही। सुबह से ही लोग मछली बाजार, मिठाई दुकानों और सब्जी मंडियों में खरीदारी करते नजर आए। ताजी मछलियों और पारंपरिक मिठाइयों की मांग सबसे ज्यादा रही।
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