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Hazaribagh (Sunil Kumar, Daru) : हजारीबाग के दारू प्रखंड की गलियों में इन दिनों छठ गीतों की मधुर धुनें गूंज रही हैं। घाटों की सफाई में जुटे हाथों में भक्ति की चमक है, और दिलों में छठी मैया के प्रति अटूट आस्था। इसी बीच, इस भक्ति के बीच एक और रोशनी जगमगाई है… इंसानियत की रोशनी। दारू थाना परिसर में इस बार सिर्फ पुलिस की गाड़ियों की आवाज नहीं, बल्कि समाजसेवा की एक नई कहानी लिखी जा रही है। थानेदार ईकबाल हुसैन, जिन्होंने धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर व्रतियों की परेशानी को अपनी जिम्मेदारी बना लिया।
जब भक्ति में आ जाती है मुश्किल, तो मदद बन जाती है पूजा
थानेदार ईकबाल हुसैन कहते हैं… “छठ हमारे क्षेत्र के हजारों परिवारों की आस्था का पर्व है। जब लोग भगवान भास्कर और छठी मैया की पूजा में जुटे हैं, तो प्रशासन का फर्ज है कि उन्हें कोई कठिनाई न हो।” इसी सोच से उन्होंने थाना परिसर में आम लकड़ी की निःशुल्क व्यवस्था की है। यह वही लकड़ी है, जिस पर खरना का प्रसाद तैयार होता है। छठ घाटों पर व्रती सूर्य अर्घ्य के बाद हवन करतीं हैं, घरों में पूजन होता है और आस्था की लौ टिमटिमाती है।
एक मुसलमान अफसर, जिसने छठ व्रतियों के लिए खोला थाना परिसर
जहां कुछ लोग धर्म को दीवार बना देते हैं, वहीं ईकबाल हुसैन ने उसे सेतु बना दिया। उनके नेतृत्व में दारू थाना ने हर साल की तरह इस बार भी छठ व्रतियों को जलावन की मुफ्त सुविधा दी है। थाना में आने वाले व्रतियों का स्वागत सम्मान के साथ होता है। कोई गरीब किसान, कोई वृद्ध महिला… सबके चेहरे पर संतोष की मुस्कान होती है। यही मुस्कान थानेदार के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार होता है।
लोग बोले… यही है असली सेवा, जो दिलों को जोड़ती है
ग्रामीणों का कहना है कि थानेदार ईकबाल हुसैन न केवल एक कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी हैं, बल्कि जनसेवा की भावना से ओतप्रोत इंसान हैं। स्थानीय कुछ लोगों ने हौले से कहा, “हमने पहली बार देखा कि पुलिस थाना भी समाज की मदद के लिए इतना आगे आ सकता है। ये सिर्फ लकड़ी नहीं, यह सौहार्द की मशाल है।”
“जहां खाकी बनी सहयोगी, वहां पर्व ने पाया नया अर्थ”
थाना परिसर को सजाया गया है… दीपों से, रांगोली से और सबसे बढ़कर, एकजुटता के भाव से। चारों ओर छठ गीतों की गूंज है — “केलवा जे फरेला घवद से…” और इन्हीं स्वरों के बीच थानेदार ईकबाल हुसैन सभी व्रतियों से कहते हैं… “यह पर्व सिर्फ पूजा का नहीं, बल्कि आपसी प्रेम और शांति का भी है। आइए, इसे साथ मिलकर मनाएं… सौहार्द के संग।”
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