अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : एक सुरक्षित कार्यस्थल कैसा होता है? जहां हर सुबह कोई डर या झिझक लेकर न पहुंचे, बल्कि अपने काम, अपनी काबिलीयत और अपने सम्मान के भरोसे कदम आगे बढ़ाए। रामगढ़ के ‘बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड’ (BFCL) के ट्रेनिंग हॉल में जब दर्जनों अधिकारी और कर्मचारी एक साथ जमा हुए, तो माहौल में यही बात हवाओं में तैर रही थी।
मौका था महिलाओं के कार्यस्थल पर उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम (POSH Act) पर आयोजित एक खास विधिक साक्षरता शिविर का। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली द्वारा चलाए जा रहे ’90 दिवसीय जागरूकता अभियान’ के तहत यह पहल की गई। रामगढ़ के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मो. तौफीकुल हसन के मार्गदर्शन और DLSA सचिव अनिल कुमार सिंह के निर्देशन में हुआ यह आयोजन सिर्फ एक कानूनी सत्र नहीं रहा, बल्कि संवेदनशीलता और बदलाव का गवाह बना।
“भयमुक्त माहौल देना मजबूरी नहीं, हमारी जिम्मेदारी है”
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) रामगढ़ के मुख्य एलएडीसी (LADC) सुजीत कुमार सिंह ने जब बोलना शुरू किया, तो बात सिर्फ धाराओं और धाराओं के पैराग्राफ तक सीमित नहीं रही। उन्होंने सीधे दिल को छूने वाले अंदाज में कहा… “सुरक्षित कार्यस्थल सिर्फ कागजी नियम नहीं है। किसी भी महिला को ऐसा माहौल देना जहाँ वह बिना किसी झिझक या डर के काम कर सके, यह हर संस्थान का नैतिक कर्तव्य है।”
उन्होंने समझाया कि कार्यस्थल पर लैंगिक समानता कोई ऐसी चीज़ नहीं जिसे ज़बरदस्ती थोपा जाए, बल्कि यह एक स्वस्थ और पारदर्शी काम-काज के माहौल की पहली शर्त है।

शिकायत की प्रक्रिया से लेकर ‘आईसीसी’ के अधिकारों तक
अक्सर देखा जाता है कि कानूनी प्रक्रियाएं लोगों को जटिल और उलझी हुई लगती हैं। शिविर में इसी बात को आसान भाषा में सुलझाया गया। सुजीत कुमार सिंह ने बेहद व्यावहारिक तरीके से महिलाओं को उनके अधिकारों से रूबरू कराया।
- क्या है ICC? आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee) कैसे बनती है और यह महिलाओं की बात को गुप्त रखते हुए निष्पक्ष तरीके से कैसे सुनती है, इसे साफ तौर पर समझाया गया।
- शिकायत कैसे दर्ज कराएं? किसी भी विपरीत परिस्थिति में कदम कैसे उठाए जाएं और कानून किस तरह उनके साथ मजबूती से खड़ा है, इस पर भी बारीकी से चर्चा हुई।
सिर्फ भाषण नहीं, काम के माहौल को बदलने का संकल्प
शिविर का सबसे खूबसूरत लम्हा वह था जब बीएफसीएल के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर एक संकल्प लिया। हॉल में मौजूद हर शख्स ने एक स्वर में यह माना कि महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और गरिमा से बड़ा कोई लक्ष्य नहीं हो सकता। कर्मचारियों ने कहा कि यह सिर्फ कंपनी के परिसर तक सीमित रहने वाला विचार नहीं है, बल्कि इसे दैनिक व्यवहार में उतारना जरूरी है।
बदलाव की राह पर BFCL
कार्यक्रम के समापन पर बीएफसीएल प्रबंधन के चेहरे पर भी एक संतोष था। कंपनी के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे अपने यहां ऐसा माहौल बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं जहाँ हर कर्मचारी खुद को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे।
प्रबंधन का मानना है कि इस तरह के सत्रों से कर्मचारियों के भीतर न सिर्फ कानूनी समझ बढ़ती है, बल्कि आपस में पारदर्शिता, बराबरी और सम्मान की संस्कृति भी गहरी होती है।
“सुरक्षित कार्यस्थल केवल एक कानूनी दायित्व नहीं है, यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।”
रामगढ़ में गूंजी यह बात यह बताती है कि जब कानून और नीयत एक साथ मिलते हैं, तो एक ऐसा कार्यस्थल तैयार होता है जहां हर कदम पर सम्मान होता है, डर नहीं।
इसे भी पढ़ें : माइंस से माउस तक… कोयले के योद्धाओं ने लिख डाला बदलाव का नया अध्याय

