अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : रामगढ़ शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शुमार सुभाष चौक पर इन दिनों आम जनता का चलना दूभर हो गया है। वजह है भुरकुंडा और पतरातू रूट पर चलने वाले ऑटो और टेंपो की बेतरतीब पार्किंग। सड़क किनारे तो छोड़िए, अब तो आधी सड़क पर गाड़ियां खड़ी कर दी जाती हैं। सवारी बैठाने की होड़ ऐसी मची रहती है कि चालक बीच रास्ते में ही गाड़ी रोक देते हैं। ऐसे में दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि सार्वजनिक सड़क पर चल रही यह मनमानी कब रुकेगी और जिम्मेदार प्रशासन अपनी नींद से कब जागेगा। क्या व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
हॉर्न बजाते रह जाते हैं लोग, नहीं टस से मस होते ऑटो चालक
सुभाष चौक से भुरकुंडा और पतरातू आने-जाने वाले वाहन चालकों को संकरी सड़क के कारण भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है। पीछे से आ रही निजी गाड़ियों के चालक लगातार हॉर्न बजाकर रास्ता मांगते रहते हैं, लेकिन आरोप है कि कई ऑटो चालक रास्ता देने की जहमत तक नहीं उठाते। नतीजतन, कुछ ही मिनटों में गाड़ियों की लंबी कतार लग जाती है और लोगों का कीमती समय बर्बाद होता है। स्थानीय राहगीरों का कहना है कि यह रोज की कहानी बन चुकी है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों, दफ्तर के लिए निकले कर्मचारियों और बाजार आने वाले बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है।

जाम में फंस रही एंबुलेंस, हादसे की बनी रहती है आशंका
इस अव्यवस्था का सबसे डरावना पहलू यह है कि जाम में अक्सर गंभीर मरीज और आपातकालीन वाहन फंस जाते हैं। जरूरी काम से निकले लोगों को भारी देरी का सामना करना पड़ता है। अगर आपात स्थिति में किसी एंबुलेंस को रास्ता न मिले, तो इसका नतीजा कितना गंभीर हो सकता है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। इसके अलावा, बीच सड़क पर अचानक ब्रेक लगाकर सवारी चढ़ाने और उतारने के चक्कर में आए दिन पीछे से आने वाले दोपहिया वाहन टकराने से बचते हैं। पैदल चलने वाले लोगों के चोटिल होने का खतरा भी हर पल सिर पर मंडराता रहता है।
एजेंटी प्रथा पर लगे रोक, तय हो स्थायी ऑटो पड़ाव
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क पर लगने वाले इस जाम के पीछे ऑटो चालकों की मनमानी के साथ-साथ एजेंटी का खेल भी जिम्मेदार है। सवारी भरने के चक्कर में नियम-कायदों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। लोगों की मांग है कि जिला प्रशासन, छावनी परिषद और ट्रैफिक पुलिस मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें। इसके लिए ऑटो और टेंपो का एक निर्धारित पड़ाव तय किया जाए, जहां से वे क्रमवार तरीके से खुलें। साथ ही बीच सड़क पर गाड़ी खड़ी करने और यातायात बाधित करने वालों पर नियमित चालान और सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि कागजों की बजाय धरातल पर सुधार नजर आ सके।
इसे भी पढ़ें : राजधानी में फायरिंग की गुत्थी सुलझी नहीं और गन पॉइंट पर हो गयी घर में डकैती


