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Home » गैस सिलेंडर बुक किया और खाते से गायब हो गए पैसे, जानिए नया फ्रॉड
रांची

गैस सिलेंडर बुक किया और खाते से गायब हो गए पैसे, जानिए नया फ्रॉड

May 16, 2026No Comments4 Mins Read
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गैस
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News Samvad : देशभर में करोड़ों लोग रोजाना रसोई गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं। इन दिनों गैस डिलीवरी के लिए कई जगहों पर DAC यानी डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड अनिवार्य कर दिया गया है। इसका मकसद सही ग्राहक तक सिलेंडर पहुंचाना और फर्जी डिलीवरी रोकना है। लेकिन अब साइबर जालसाजों ने इसी सिस्टम को लोगों के खिलाफ इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।गैस बुकिंग, सब्सिडी अपडेट और ई-केवाईसी के नाम पर लोगों को फोन कॉल, मैसेज और फर्जी लिंक भेजे जा रहे हैं। जैसे ही कोई ग्राहक इनके झांसे में आता है, उसकी निजी जानकारी और बैंक डिटेल्स ठगों तक पहुंच जाती हैं। कई मामलों में लोगों के बैंक खाते तक खाली हो चुके हैं।

पहला तरीका: फर्जी लिंक भेजकर फोन हैक करना

ठगी का सबसे आम तरीका फर्जी मैसेज है। लोगों के मोबाइल पर मैसेज आता है कि उनका गैस सिलेंडर बुक हो गया है या डिलीवरी के लिए कन्फर्मेशन जरूरी है। इसके साथ एक लिंक भी भेजा जाता है।जैसे ही ग्राहक उस लिंक पर क्लिक करता है, उसके फोन में खतरनाक ऐप या वायरस इंस्टॉल हो सकता है। इसके बाद मोबाइल में मौजूद बैंकिंग ऐप, पासवर्ड, ओटीपी और निजी जानकारी जालसाजों तक पहुंच सकती है।कई बार लिंक बिल्कुल असली वेबसाइट जैसा दिखता है, इसलिए लोग आसानी से धोखा खा जाते हैं।

दूसरा तरीका: ई-केवाईसी और DAC के नाम पर ओटीपी ठगी

कुछ लोगों को फोन करके कहा जाता है कि उनका गैस कनेक्शन ई-केवाईसी न होने की वजह से बंद होने वाला है। इसके बाद उनसे आधार नंबर, बैंक डिटेल्स और मोबाइल पर आया ओटीपी मांगा जाता है।जालसाज इसे DAC या वेरिफिकेशन कोड बताकर लोगों को भ्रमित करते हैं। जैसे ही ग्राहक ओटीपी बता देता है, ठग उसके बैंक खाते तक पहुंच बना लेते हैं और पैसे निकाल लेते हैं।ध्यान रखने वाली बात यह है कि असली गैस एजेंसी कभी भी फोन पर बैंक जानकारी या ओटीपी नहीं मांगती।

तीसरा तरीका: रुकी हुई सब्सिडी दिलाने का झांसा

अब एक नया तरीका भी सामने आया है। इसमें ठग फोन करके कहते हैं कि आपकी गैस सब्सिडी रुकी हुई है और उसे खाते में भेजने के लिए एक ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा।जब ग्राहक फॉर्म खोलता है तो उसमें आधार नंबर, जन्मतिथि, बैंक खाता और दूसरी निजी जानकारी मांगी जाती है। लोग सरकारी प्रक्रिया समझकर जानकारी भर देते हैं, लेकिन असल में ये सारी डिटेल्स सीधे जालसाजों तक पहुंच जाती हैं।इसके बाद पहचान की चोरी, बैंक फ्रॉड और दूसरे साइबर अपराध किए जा सकते हैं।

ऐसे पहचानें कि कॉल या मैसेज फर्जी है

साइबर ठगी से बचने के लिए कुछ बातों पर खास ध्यान देना जरूरी है।

  • गैस एजेंसियां कभी भी निजी मोबाइल नंबर से कॉल करके बैंक डिटेल्स या ओटीपी नहीं मांगतीं।
  • मैसेज में आए संदिग्ध लिंक, गलत स्पेलिंग या अजीब वेबसाइट एड्रेस फर्जी हो सकते हैं।
  • डिलीवरी से पहले एडवांस पेमेंट या अतिरिक्त चार्ज मांगने वाले कॉल से सावधान रहें।
  • व्हाट्सएप पर भेजे गए लिंक या APK फाइल डाउनलोड करने से बचें।
  • DAC कोड सिर्फ सिलेंडर मिलने के समय डिलीवरी बॉय को ही बताएं।

ठगी से बचने के आसान और जरूरी उपाय

गैस से जुड़ी किसी भी सेवा के लिए हमेशा आधिकारिक ऐप या वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें। जैसे कि IndianOil One, HP Pay और BharatGas।किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी, बैंक खाता नंबर, डेबिट कार्ड जानकारी या आधार डिटेल्स साझा न करें।सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि सिलेंडर घर पहुंचने के बाद ही DAC नंबर साझा करें और भुगतान नकद या आधिकारिक QR कोड से करें।अगर कोई कॉल या मैसेज संदिग्ध लगे तो तुरंत अपनी स्थानीय गैस एजेंसी से संपर्क करें।

फ्रॉड हो जाए तो तुरंत क्या करें

अगर आप इस तरह की साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं तो देर बिल्कुल न करें।

  • तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
  • अपने बैंक को तुरंत जानकारी दें और कार्ड या खाते को अस्थायी रूप से ब्लॉक कराएं।
  • नजदीकी पुलिस स्टेशन और गैस एजेंसी में शिकायत दर्ज करें।
  • गृह मंत्रालय के साइबर पोर्टल National Cyber Crime Reporting Portal पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज की जा सकती है।साइबर जालसाज लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में थोड़ी सी सतर्कता ही आपकी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रख सकती है।
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