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Pawan Thakur, Ranchi
तारीख 13 अक्टूबर, वक्त सुबह के ठीक 7 बजे। रांची के कांके इलाके में रिंग रोड से सटी आदर्शनगर कॉलोनी (गागी) में रोज की तरह चहल-पहल शुरू ही हो रही थी। रामशंकर प्रसाद सिंह के घर का मुख्य दरवाजा जैसे ही खुला, अचानक कई हथियारबंद बदमाश अंदर घुस आए। इससे पहले कि घर का कोई सदस्य कुछ समझ पाता, बदमाशों ने तमंचे और धारदार हथियार तान दिए। पूरे परिवार को एक कमरे में बंधक बना लिया गया। चीखने पर जान से मारने की सीधी धमकी दी गई। इसके बाद अलमारियों के ताले तोड़े गए, तिजोरियां खंगाली गईं और घर में रखे भारी मात्रा में नकदी और सोने-चांदी के कीमती जेवरात समेटकर बदमाश फरार हो गए। दिनदहाड़े हुए इस दुस्साहसिक कांड से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
सितंबर से चल रहा था खेल, सफेदपोश चेहरों के पीछे छिपी थी साजिश
रांची के रुरल एसपी गौरव गोस्वामी ने मीडिया को बताया कि वारदात जितनी अचानक लगी, उसकी स्क्रिप्ट उतनी ही पहले लिखी जा चुकी थी। जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य पिछले सितंबर महीने से ही रामशंकर सिंह के घर पर गिद्ध जैसी नजर गड़ाए हुए थे। कौन कब घर से निकलता है, कब लौटता है, घर में कितने लोग रहते हैं और सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं, इसकी एक-एक जानकारी जुटाई जा रही थी। इस पूरी साजिश में न केवल पेशेवर अपराधी शामिल थे, बल्कि रांची में रहकर सामान्य जिंदगी जी रहे चेहरे भी मददगार बने हुए थे। सुखदेवनगर की रहने वाली कम्मो देवी समेत अन्य स्थानीय सहयोगियों ने गिरोह के लिए छिपने का ठिकाना और जरूरी साजो-सामान का बंदोबस्त किया था। हथियारों से लेकर गाड़ियों तक का पूरा इंतजाम कर वारदात का सटीक दिन चुना गया।
पुलिस की नाकेबंदी देख लावारिस छोड़ी इनोवा
डकैती को अंजाम देकर बदमाश एक ग्रे रंग की इनोवा कार (JH14C-4405) में सवार होकर रिंग रोड के रास्ते भागे। सूचना मिलते ही रांची पुलिस हरकत में आ गई और पूरे शहर की सीमा पर सख्त नाकेबंदी कर दी गई। इसी बीच पिठौरिया थाना क्षेत्र के कोकदोरो चौक के पास इनोवा कार ने उन्हें धोखा दे दिया यानी कि गाड़ी में खराबी आ गयी। अपराधियों को इनोवा को लावारिस छोड़कर अलग-अलग रास्तों से पैदल और दूसरे साधनों से भागना पड़ा। लेकिन वे यह भूल गए कि आधुनिक पुलिसिंग की नजर से बचना इतना आसान नहीं होता। रांची एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश और रुरल एसपी गौरव गोस्वामी की देखरेख में सीनियर डीएसपी अमर कुमार पांडेय की अगुआई में विशेष टीम ने घटनास्थल से लेकर भागने के रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और मोबाइल टावर डंप डेटा का विश्लेषण शुरू किया। इसी तकनीकी सुराग ने पुलिस को गिरोह की एक-एक कड़ी तक पहुंचा दिया।
तीन थाना क्षेत्रों में एक साथ आधी रात की छापेमारी, महिला समेत छह दबोचे गए
एसआईटी ने बरियातू, दलादली और सुखदेवनगर में एक साथ कई ठिकानों पर आधी रात को ताबड़तोड़ दबिश दी। इस कार्रवाई में अंतरराज्यीय गिरोह के छह प्रमुख सदस्य दबोच लिए गए। पकड़े गए आरोपियों में बिहार के भोजपुर निवासी बीर बहादुर सिंह और सुधीर कुमार, सुखदेवनगर में रह रही कम्मो देवी, चतरा का चंद्रशेखर पांडेय, बक्सर का सुमित कुमार सिंह और औरंगाबाद का रजनीश सिंह शामिल हैं। बीर बहादुर और रजनीश का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है और वे पहले भी लूट और डकैती के मामलों में जेल जा चुके हैं। इनके पास से लूटी गई रकम में से 4 लाख 24 हजार रुपये नकद, 8 मोबाइल फोन, वारदात में प्रयुक्त इनोवा और एक काले रंग की स्कॉर्पियो (JH01EX-1156) बरामद कर ली गई है। पुलिस की जांच में कुल 14 अपराधियों के नाम सामने आए हैं, बाकी 8 फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और शेष जेवरात की बरामदगी के लिए झारखंड और बिहार के कई जिलों में लगातार छापेमारी जारी है।
रांची के कांके में डकैती का खुलासा। महिला समेत 6 शातिर अपराधी अरेस्ट। ₹4.24 लाख नकद बरामद। इनोवा व स्कॉर्पियो कार और 8 मोबाइल जब्त। रुरल एसपी गौरव गोस्वामी खोल गये राज
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