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Ranchi (Sunil Poddar) : क्लासरूम के ब्लैकबोर्ड और मोटी-मोटी किताबों के पन्नों में जो बातें सिर्फ सिद्धांत बनकर रह जाती हैं, उन्हें जब छात्र अपनी आंखों से सामने घटते देखते हैं, तो सीखने का नजरिया पूरी तरह बदल जाता है। इसी सोच के साथ SBU यानी सरला बिरला यूनिवर्सिटी ने अपने स्टूडेंट्स को सिर्फ क्लासरूम तक सीमित न रखकर देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों और सांस्कृतिक मंचों के बीच भेजा है। कई छात्र ऐसे भी हैं जो अपनी जिंदगी में पहली बार राज्य की सीमा पार कर देश के बड़े शहरों में पहुंचे हैं। उनके लिए यह केवल एक शैक्षणिक दौरा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और दुनिया को देखने की नई खिड़की खुलने जैसा है।
IIT दिल्ली की प्रयोगशालाओं में दिखा आधुनिक तकनीक का दम
सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग के 23 विद्यार्थियों का दल जब देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान IIT दिल्ली पहुंचा, तो उनके सामने सिर्फ एक बड़ा कॉलेज नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीक का जीता-जागता मॉडल था। यहां छात्रों ने आधुनिक प्रयोगशालाओं में चल रहे रिसर्च और जटिल परीक्षणों को बेहद करीब से देखा। पर्यावरण से जुड़ी नई चुनौतियों, टिकाऊ निर्माण तकनीक और पानी के पुनर्चक्रण जैसे अहम विषयों पर काम कर रहे विशेषज्ञों से छात्रों ने सीधे सवाल-जवाब किए। विशेषज्ञों ने छात्रों को समझाया कि बीटेक के बाद उच्च शिक्षा की क्या राहें हैं, किन छात्रवृत्तियों का फायदा उठाकर शोध की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है और इंडस्ट्री में किस तरह के प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ रही है।

बेंगलुरु की टेक-दुनिया… ISRO, DRDO और स्टार्टअप संस्कृति का अनुभव
कंप्यूटर साइंस और एमसीए के 30 विद्यार्थियों की टीम देश की आईटी राजधानी बेंगलुरु में 10 दिनों के लंबे एक्सपोजर पर है। 27 अक्टूबर से शुरू हुआ यह सफर 5 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान छात्र देश के गौरव कहे जाने वाले अंतरिक्ष संगठन इसरो (ISRO), रक्षा अनुसंधान संगठन डीआरडीओ (DRDO) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के तकनीकी केंद्रों का जायजा ले रहे हैं। इसके साथ ही छात्रों को बेंगलुरु के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप माहौल और मल्टीनेशनल आईटी कंपनियों के दफ्तरों में काम करने की कार्यसंस्कृति को समझने का मौका मिल रहा है। कोड लिखने से लेकर उसे बड़े पैमाने पर लागू करने की पूरी प्रक्रिया को समझना इन युवा इंजीनियरों के लिए बिल्कुल नया और प्रेरक अनुभव साबित हो रहा है।

राजस्थान में साहित्य और संस्कृति के अनूठे संगम से संवाद
तकनीक के साथ-साथ रचनात्मकता और मानवीय संवेदनाओं को निखारने के लिए विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के विद्यार्थियों और प्राध्यापकों ने राजस्थान का रुख किया। वहां आयोजित अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव ‘वर्ड्स बियॉन्ड बॉर्डर्स’ में शामिल होकर छात्रों ने देश और विदेश के जाने-माने लेखकों, विचारकों और आलोचकों के व्याख्यान सुने। विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के आदान-प्रदान वाले इस मंच पर छात्रों ने खुलकर संवाद किया। इस भागीदारी का सीधा असर छात्रों के सोचने के दायरे और साहित्यिक दृष्टिकोण पर पड़ा, जो अमूमन किसी एक विषय की कक्षा में रहकर संभव नहीं हो पाता।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और आत्मनिर्भर सोच को नई दिशा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी इसी बात पर जोर देती है कि पढ़ाई सिर्फ परीक्षा पास करने का जरिया न बने, बल्कि वह जीवन और करियर की व्यावहारिक जरूरतों से जुड़े। विश्वविद्यालय के इस कदम से छात्रों की सोच में एक बड़ा बदलाव आ रहा है। वे अब सिर्फ स्थानीय स्तर पर नौकरी ढूंढने के बजाय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने हुनर को आजमाने का हौसला जुटा रहे हैं।
इस पूरी पहल पर खुशी जाहिर करते हुए विश्वविद्यालय के प्रतिकुलाधिपति बिजय कुमार दलान, महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक, कुलपति प्रो. सी जगनाथन और राज्यसभा सांसद सह निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने कहा कि जब छात्र बड़े संस्थानों के माहौल और वहां काम कर रहे लोगों से मिलते हैं, तो उनकी हिचकिचाहट पूरी तरह खत्म हो जाती है। विश्वविद्यालय की यह कोशिश है कि झारखंड का युवा तकनीकी समझ, आत्मविश्वास और नवाचार के साथ आगे बढ़कर देश निर्माण में अपनी पूरी भागीदारी निभाए।
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