अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ramgarh (Prince Verma) : नेताओं के काफिले अक्सर सायरन और सुरक्षा के लिए चर्चा में रहते हैं, लेकिन रविवार को चुटुपालू घाटी में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद लोगों का दिल छू लिया। झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता तथा उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री योगेंद्र महतो ने अपने व्यस्त कार्यक्रम और प्रोटोकॉल से ऊपर उठकर इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है।
सड़क किनारे दर्द से कराह रहे थे मां-बेटा
रविवार, 7 जून को मंत्री योगेंद्र महतो रांची से रामगढ़ की ओर एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान चुटुपालू घाटी में सड़क किनारे एक महिला और उसका मासूम बेटा घायल अवस्था में पड़े दिखाई दिए। दोनों किसी सड़क हादसे का शिकार हुए थे और दर्द से कराह रहे थे। घटना स्थल पर मौजूद लोगों के मुताबिक हादसे के बाद काफी देर तक दोनों मदद का इंतजार कर रहे थे। राहगीर रुककर देख तो रहे थे, लेकिन कोई उन्हें अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी नहीं ले रहा था।
मंत्री ने तुरंत रुकवाया काफिला
घायलों को देखकर मंत्री योगेंद्र महतो ने बिना देर किए अपना काफिला रुकवा दिया। उन्होंने पूरी स्थिति को समझा और तुरंत अपनी गाड़ी से उतरकर घायल महिला और बच्चे का हाल जाना। मंत्री ने अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों को निर्देश दिया कि दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया जाए। इसके बाद उन्होंने खुद अपनी कार्केड में मां-बेटे को बैठाया और अस्पताल के लिए रवाना हो गए।
खुद अस्पताल पहुंचकर शुरू करवाया इलाज
मंत्री योगेंद्र महतो सीधे घायलों को लेकर सैनी होटल के पास स्थित आपातकालीन सेवा अस्पताल पहुंचे। वहां उन्होंने डॉक्टरों से मुलाकात की और घायलों का तुरंत इलाज शुरू करवाया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार महिला और बच्चे की हालत गंभीर थी, लेकिन समय पर अस्पताल पहुंच जाने के कारण उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल सकी। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों की स्थिति पर लगातार निगरानी शुरू कर दी।
डॉक्टरों को दिए बेहतर इलाज के निर्देश
अस्पताल में मंत्री ने चिकित्सकों से स्पष्ट कहा कि घायलों के इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया और जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर करने की बात भी कही। मंत्री ने अस्पताल प्रबंधन से घायलों की स्थिति की पूरी जानकारी ली और उनके परिजनों तक सूचना पहुंचाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित कराई।
प्रत्यक्षदर्शियों ने की सराहना
घटना के समय मौजूद लोगों ने मंत्री की संवेदनशीलता की खुलकर तारीफ की। स्थानीय लोगों का कहना था कि अक्सर वीआईपी काफिले तेजी से निकल जाते हैं, लेकिन योगेंद्र महतो ने जो किया, वह हर किसी के बस की बात नहीं है। एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, “हमने पहली बार किसी मंत्री को इस तरह खुद गाड़ी से उतरकर घायल लोगों की मदद करते देखा। उन्होंने साबित कर दिया कि जनता की सेवा सिर्फ भाषणों से नहीं, बल्कि ऐसे कामों से होती है।”
सोशल मीडिया पर भी हो रही चर्चा
घटना के बाद मंत्री योगेंद्र महतो के इस मानवीय कदम की चर्चा सोशल मीडिया पर भी शुरू हो गई। लोगों ने उनकी संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय की सराहना करते हुए उन्हें जनता का सच्चा सेवक बताया।
इसे भी पढ़ें : “अगली गोली खोपड़ी में मारेंगे”, पुर्तगाल में फायरिंग का भारत के गैंगस्टर का दावा… देखें वायरल पोस्ट

