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Pakur (Jaydev Kumar) : शहर के बैंक कॉलोनी की एक साधारण सी इमारत में जब बच्चों की हंसी और कीबोर्ड की आवाजें गूंजने लगीं, तो लुत्फल हक के चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान थी। जिन बच्चों के घरों में कभी कंप्यूटर का नाम तक नहीं लिया जाता था, अब वही बच्चे मॉनीटर पर टाइपिंग सीख रहे हैं। यह दृश्य उनके लिए किसी सपने से कम नहीं।
गरीब बच्चों की तकनीकी शिक्षा पर नजर
पाकुड़ में लुत्फल हक का नाम लोगों के बीच समाजसेवा के लिए जाना जाता है। किसी की दवा का खर्च उठाना हो या किसी गरीब परिवार के लिए भोजन और कपड़े जुटाना… वे हमेशा आगे रहते हैं। लेकिन अब उन्होंने एक कदम और आगे बढ़ाया है। इस बार उनकी नजर उन बच्चों पर है, जो गरीबी की वजह से तकनीकी शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
“गरीब बच्चे भी कंप्यूटर सीखें, यही सपना है”
बैंक कॉलोनी स्थित सिटी ट्रेनिंग सेंटर में लुत्फल हक ने निःशुल्क कंप्यूटर ट्रेनिंग कार्यक्रम की शुरुआत की। यह एक साल का एडीसीए कोर्स है, जिसमें गरीब परिवारों के बच्चों को बिना किसी शुल्क के पढ़ाया जाएगा। लुत्फल हक कहते हैं, “आज की दुनिया में कंप्यूटर की जानकारी उतनी ही जरूरी है, जितनी पढ़ना-लिखना। मैं चाहता हूं कि हमारे इलाके के बच्चे भी इस शिक्षा से पीछे न रहें।”
मुफ्त शिक्षा, रोजगार का वादा
सिटी ट्रेनिंग सेंटर के निदेशक हैदर अली बताते हैं कि यह कार्यक्रम पूरी तरह नि:शुल्क है। लुत्फल हक और हमारे सेंटर के सहयोग से यह कोर्स शुरू हुआ है। इसमें एमएस ऑफिस, टैली जीएसटी, टाइपिंग, फोटोशॉप, इंटरनेट और डिजाइनिंग जैसे विषय शामिल हैं। छात्रों को नोटबुक, टी-शर्ट और पेन भी मुफ्त में मिलेंगे। 60 बच्चों की पहली बैच शुरू हो चुकी है। कोर्स पूरा करने के बाद उन्हें प्रमाणपत्र और रोजगार के अवसर भी दिए जाएंगे।

उम्मीदों से भरी आंखें
कक्षा में बैठी नाजिया खातून, जिसके पिता रिक्शा चलाते हैं, मुस्कुराते हुए कहती है कि हमारे घर में कभी कंप्यूटर नहीं था। अब हम खुद सीख रहे हैं। आगे जाकर मैं ऑफिस में काम करना चाहती हूं। उसके जैसी कई और लड़कियां और लड़के हैं, जिनके लिए यह प्रशिक्षण भविष्य की पहली सीढ़ी है।
“यह सिर्फ कोर्स नहीं, एक सामाजिक बदलाव है”
लुत्फल हक कहते हैं कि समाज को बदलने के लिए केवल मदद देना काफी नहीं, अवसर देना जरूरी है। मेरा सपना है कि पाकुड़ के हर बच्चे के पास हुनर हो, ताकि कोई गरीबी को अपनी किस्मत न माने।
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