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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : कभी जिस पतरातू की पहचान पुराने बिजलीघर से होती थी, आज वही इलाका देश के सबसे मॉर्डन थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स में अपनी अलग पहचान बना रहा है। गुरुवार को PVUNL यानी पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड ने अपनी दूसरी 800 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट का कमर्शियल ऑपरेशन शुरू कर दिया। इसके साथ ही महज सात महीनों में परियोजना की दो यूनिटों से 1600 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता देश को मिल गई है। यह सिर्फ एक नई यूनिट के चालू होने की खबर नहीं है, बल्कि झारखंड के ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते आत्मविश्वास की कहानी भी है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में झारखंड समेत कई राज्यों को ज्यादा भरोसेमंद बिजली मिलेगी और उद्योगों से लेकर आम लोगों तक को इसका फायदा पहुंचेगा।
सिर्फ मशीनें नहीं, हजारों लोगों की मेहनत का नतीजा
किसी भी बिजली परियोजना के पीछे सिर्फ बड़े-बड़े बॉयलर और टरबाइन नहीं होते, बल्कि हजारों इंजीनियरों, तकनीशियनों, श्रमिकों और विशेषज्ञों की दिन-रात की मेहनत छिपी होती है। पतरातू परियोजना की दूसरी यूनिट का सफल संचालन भी उसी सामूहिक प्रयास का परिणाम है। पीवीयूएनएल के अधिकारियों का कहना है कि तय समय के भीतर इतनी बड़ी क्षमता की दो यूनिटों को चालू करना आसान नहीं था। इसके लिए हर विभाग ने मिलकर लगातार काम किया। यही वजह है कि सात महीने के भीतर दो बड़ी यूनिटें सफलतापूर्वक राष्ट्र को समर्पित की जा सकीं।
झारखंड की बिजली व्यवस्था को मिलेगा बड़ा सहारा
झारखंड तेजी से औद्योगिक विकास की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में बिजली की बढ़ती जरूरत सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है। नई यूनिट शुरू होने से राज्य की बिजली व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही अन्य लाभार्थी राज्यों को भी नियमित और पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन क्षमता बढ़ने से भविष्य की मांग को पूरा करना आसान होगा और बिजली आपूर्ति पहले से ज्यादा स्थिर बनेगी। पतरातू सुपर ताप विद्युत परियोजना की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी। अब इस परियोजना की दो यूनिटें पूरी तरह व्यावसायिक उत्पादन में आ चुकी हैं। इससे यह परियोजना देश की प्रमुख ताप विद्युत परियोजनाओं में शामिल होती जा रही है।
स्थानीय लोगों का भरोसा बना ताकत
परियोजना के दौरान आसपास के गांवों के लोगों और परियोजना प्रभावित परिवारों का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। पीवीयूएनएल का कहना है कि स्थानीय समुदाय का विश्वास ही इस सफलता की सबसे बड़ी ताकत बना। कंपनी लगातार आसपास के क्षेत्रों में कौशल विकास, महिलाओं के सशक्तीकरण, आजीविका बढ़ाने और सामाजिक विकास से जुड़े कार्यक्रम चला रही है, ताकि विकास का लाभ स्थानीय लोगों तक भी पहुंचे।
सीईओ ने पूरी टीम को दिया सफलता का श्रेय
इस उपलब्धि पर आयोजित कार्यक्रम में पीवीयूएनएल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ए.के. सहगल ने कर्मचारियों, अभियंताओं, श्रमिकों, विक्रेताओं और परियोजना से जुड़े सभी सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि टीमवर्क, समर्पण और लगातार मेहनत के कारण ही यह उपलब्धि हासिल हो सकी है। उन्होंने एनटीपीसी प्रबंधन, झारखंड सरकार, जिला प्रशासन, नियामक संस्थाओं और सभी परियोजना भागीदारों का भी आभार जताया। उनका कहना था कि सभी के सहयोग से ही परियोजना तय समय पर आगे बढ़ सकी।
अब आगे और बड़ी उम्मीदें
दूसरी यूनिट के कमर्शियल ऑपरेशन के साथ PVUNL ने यह संदेश दिया है कि झारखंड सिर्फ खनिज संपदा का प्रदेश नहीं, बल्कि ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में भी तेजी से नई पहचान बना रहा है। आधुनिक तकनीक, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और बेहतर संचालन के साथ यह परियोजना आने वाले वर्षों में देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी।
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