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Dhanbad : लोकतंत्र क्या होता है, वोट क्यों जरूरी है और एक अच्छा प्रतिनिधि कैसे चुना जाता है? इन सवालों के जवाब बच्चों ने इस बार किताबों से नहीं, बल्कि खुद मतदान करके सीखे। गोविंदपुर स्थित ग्लोबल स्कूल ऑफ इंडिया में छात्र परिषद् चुनाव का आयोजन हुआ, जहां पूरे दिन स्कूल का माहौल किसी असली चुनाव से कम नहीं दिखा।
बच्चों के चेहरों पर उत्साह साफ नजर आ रहा था। कोई अपने पसंदीदा उम्मीदवार के लिए प्रचार कर रहा था, तो कोई मतदान की बारी आने का इंतजार कर रहा था। जब वोट डालने की बारी आई तो सभी ने पूरी गंभीरता के साथ अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इस पूरे आयोजन का मकसद सिर्फ छात्र प्रतिनिधि चुनना नहीं था, बल्कि बच्चों को लोकतंत्र की ताकत और जिम्मेदारी से भी रूबरू कराना था।

किताबों से निकलकर लोकतंत्र पहुंचा बच्चों के बीच
चुनाव शुरू होने से पहले शिक्षकों ने विद्यार्थियों को लोकतंत्र की पूरी प्रक्रिया समझाई। बच्चों को बताया गया कि मतदान का अधिकार कितना महत्वपूर्ण होता है और एक मजबूत लोकतंत्र की नींव निष्पक्ष चुनाव पर टिकी होती है। यह भी समझाया गया कि सही प्रतिनिधि चुनने का फैसला सोच-समझकर करना चाहिए। जब बच्चों ने यह सब सुना तो उनके अंदर चुनाव को लेकर उत्सुकता और भी बढ़ गई। इसके बाद पूरा स्कूल लोकतंत्र की एक जीवंत पाठशाला में बदल गया।

प्रचार भी हुआ, वादे भी हुए
स्कूल कैप्टन, हाउस कैप्टन, स्पोर्ट्स कैप्टन, कल्चरल कैप्टन और डिसिप्लिन कैप्टन के पदों के लिए उम्मीदवार मैदान में थे। मतदान से पहले सभी प्रत्याशियों ने अपने साथियों के सामने अपनी योजनाएं रखीं। किसी ने अनुशासन बेहतर बनाने की बात कही, तो किसी ने खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का वादा किया। इस दौरान बच्चों ने भी सवाल पूछे और अपने हिसाब से उम्मीदवारों का आकलन किया। इससे उन्हें यह समझने का मौका मिला कि चुनाव में सिर्फ लोकप्रियता नहीं, बल्कि काम करने की सोच भी मायने रखती है।

गुप्त मतदान से समझी निष्पक्ष चुनाव की ताकत
मतदान की पूरी प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार कराई गई। सभी विद्यार्थियों ने गुप्त मतदान किया ताकि हर कोई बिना किसी दबाव के अपनी पसंद का उम्मीदवार चुन सके। मतदान के दौरान बच्चों ने अनुशासन बनाए रखा और पूरे उत्साह के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई। मतदान खत्म होने के बाद मतगणना हुई और विजयी उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए। परिणाम सामने आते ही विजेताओं के चेहरे खिल उठे, जबकि अन्य विद्यार्थियों ने भी खेल भावना के साथ परिणाम को स्वीकार किया।
जीत के साथ जिम्मेदारी का भी एहसास
विद्यालय प्रबंधन ने विजयी छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि नेतृत्व केवल सम्मान नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्हें अपने साथियों की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा और पूरे सत्र में ईमानदारी से अपनी भूमिका निभानी होगी।

प्रधानाचार्या ने बताया… क्यों जरूरी हैं ऐसे आयोजन
विद्यालय की प्रधानाचार्या चाँदनी त्रिगुणायत ने कहा कि छात्र परिषद् चुनाव जैसे कार्यक्रम बच्चों में नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि जब बच्चे स्कूल में लोकतंत्र को व्यवहारिक रूप से समझते हैं, तो आगे चलकर वे समाज और देश के प्रति भी अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभाते हैं।
सिर्फ चुनाव नहीं, जिंदगी का एक अहम सबक
कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों ने लोकतंत्र के सिद्धांतों का पालन करने और जिम्मेदार नागरिक बनने का संकल्प लिया। इस पूरे आयोजन में शिक्षकों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई और बच्चों को हर चरण की जानकारी दी। यह चुनाव बच्चों के लिए ऐसा अनुभव बना, जिसने उन्हें सिखाया कि लोकतंत्र केवल वोट डालने का नाम नहीं, बल्कि सही सोच, जिम्मेदारी और सबकी भागीदारी से आगे बढ़ने का रास्ता है।
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