अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : पतरातू निर्माणाधीन NTPC-PVUNL प्लांट में बीते 31 जनवरी को हुआ हादसा सिर्फ एक तकनीकी चूक नहीं था, बल्कि उसने मजदूरों की उस हकीकत को सामने ला दिया, जिसे अक्सर विकास की चमक में नजरअंदाज कर दिया जाता है। एयर कंडीशनर डक्ट की इन प्लेट सील टूटने से 12 मजदूर घायल हो गए। कुछ मजदूर ऐसे हैं जो अस्पताल के बिस्तर पर पड़े हुए हैं और उनके मन में इलाज से ज्यादा चिंता घर चलाने की है।
घायल मजदूर, टूटी हिम्मत और अधूरी जिम्मेदारी
हादसे में घायल मजदूरों का कहना है कि वे रोज की तरह काम पर आए थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि ट्रायल के दौरान सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम भी नहीं होंगे। एक घायल मजदूर ने बताया कि अचानक तेज आवाज हुई और प्लेट टूटकर गिरी। बचने का मौका तक नहीं मिला। आज हालत यह है कि हाथ पैर पर पट्टी बंधी है और परिवार यह सोचकर परेशान है कि आगे क्या होगा।
दो लाख रुपये तक मुआवजे की मांग
NTPC मजदूर यूनियन (एटक) का कहना है कि हादसे के बाद प्रबंधन की संवेदनशीलता सिर्फ कागजों तक सीमित है। यूनियन ने मांग की है कि गंभीर रूप से घायल मजदूरों को दो लाख रुपये तक मुआवजा दिया जाए, पूरा इलाज कराया जाए और जब तक मजदूर काम पर लौटने लायक न हों, तब तक उन्हें पूरा वेतन मिले। यूनियन नेताओं का साफ कहना है कि मजदूर कोई मशीन नहीं हैं, जिन्हें खराब होने पर बदल दिया जाए।
रोजी के साथ जान का भी जोखिम
मजदूरों का दर्द सिर्फ हादसे तक सीमित नहीं है। प्लांट परिसर में पार्किंग की व्यवस्था न होने से रोजाना मजदूर डर के साए में काम पर आते हैं। बाहर खड़ी मोटरसाइकिल चोरी हो जाती है। कई मजदूरों के लिए बाइक ही काम पर आने का एकमात्र साधन है। चोरी होने के बाद उनकी महीने भर की कमाई एक झटके में खत्म हो जाती है।
कैमरे और गार्ड काफी नहीं
यूनियन का कहना है कि पहले भी प्रबंधन को पार्किंग की समस्या से अवगत कराया गया था। इसके बाद सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा गार्ड लगाए गए, लेकिन चोरी की घटनाएं नहीं रुकीं। मजदूरों की मांग है कि प्लांट परिसर के अंदर ही सुरक्षित पार्किंग बनाई जाए, ताकि वे निश्चिंत होकर काम कर सकें।
प्रबंधन से जवाबदेही की मांग
NTPC मजदूर यूनियन के शाखा सचिव मनोज कुमार महतो ने साफ कहा कि अगर मजदूर सुरक्षित नहीं हैं तो किसी भी परियोजना की सफलता खोखली है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि घायल मजदूरों को उचित मुआवजा, इलाज और सुरक्षा व्यवस्था नहीं मिली तो यूनियन आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगी।
विकास के पीछे छूटती आवाजें
पतरातू प्लांट को विकास की बड़ी परियोजना के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन इस विकास की कीमत मजदूर अपनी जान और सुरक्षा से चुका रहे हैं। सवाल यह है कि क्या NTPC-PVUNL प्रबंधन मजदूरों के दर्द को सुनेगा या हर हादसे के बाद कुछ दिन की औपचारिकता निभाकर चुप बैठ जाएगा। फिलहाल घायल मजदूर और उनके परिवार जवाब का इंतजार कर रहे हैं।
इसे भी पढ़ें : धूल, दबाव और दर्द… हादसे के बाद सवालों के घेरे में NTPC-PVUNL की सुरक्षा व्यवस्था



