Close Menu
News SamvadNews Samvad
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • बिजनेस
  • स्पोर्ट्स
  • राशिफल
Facebook X (Twitter) Instagram
Tuesday, 22 September, 2026 • 12:54 am
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • AdSense Policy
  • Terms and Conditions
Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest Vimeo
News SamvadNews Samvad
  • HOME
  • INDIA
  • WORLD
  • JHARKHAND
    • RANCHI
  • BIHAR
  • UP
  • SPORTS
  • HOROSCOPE
  • CAREER
  • HEALTH
  • MORE…
News SamvadNews Samvad
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • बिजनेस
  • स्पोर्ट्स
  • राशिफल
Home » अद्भुत होती है देवघर के करणकोल में मां काली की पूजा
झारखंड

अद्भुत होती है देवघर के करणकोल में मां काली की पूजा

October 20, 2019No Comments2 Mins Read
Share Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram WhatsApp Email
Follow Us
Google News Flipboard Facebook X (Twitter)
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Telegram WhatsApp Email
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now

अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :

देवघर। देवघर जिले के करणकोल गांव में काली पूजा की तैयारी जोर शोर से की जा रही है। पूजा के लिए मंदिर की साफ-सफाई, रंगाई, प्रतिमा का बनना सभी तरह के तैयारियां जोरों पर है। काली स्पोर्टिंग क्लब के सदस्यों द्वारा निस्वार्थ होकर सभी 16 गांवों करणकोल, घोड़धोड़ा, मधुवन, चियार्धनिया, नाराही, नावाडीह, भोक्ता डीह, असंपुर, गोरा, जमुआ, तितमोह,दोनिहारी, भिखना, भीतिया और पहाड़पुर दासडीह के सभी लोगों के सहयोग से इसका सफल संचालन किया जाता रहा है। कार्तिक मास के अमवस्या के दिन मां की वैदिक विधि से पूजा किया जाता है।
बुजुर्गों के कथनानुसार करणकोल में हो रही पूजा का इतिहास बहुत पुराना है। यह पूजा परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी पिछले कई दशकों से चलती आ रही है। पूजा के उपरांत करणकोल गांव में भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें देवघर जिले के बहुत लोगों का आगमन मां काली के जागृत रूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर मेले का आनंद लेते हैं। मेले के बाद मां की प्रतिमा गांजे- बाजे, ढोल-नगाड़ोंरंग-बिरंगे जगमगाती लाइट के साथ ही नम आंखों से करणकोल के पोखर में विसर्जित कर दिया जाता है। करणकोल काली पूजा की परम्परा है कि मां की प्रतिमा जो करीब छह फीट काजो गांव के ही कलाकार सुनील झा के पूर्वजों से ही बनाया जाता रहा है। उनके घर से मंदिर तक करीब दो किलोमीटर तक ले जाना तथा विसर्जन करते समय दोनों समय मां की प्रतिमा लोंगों के कंधे पर ही रख के किया जाता आ रहा है ।
काली पूजा के दौरान तीन दिन विशेष कलश स्थापित होने के साथ ही विसर्जन होने तक सम्पूर्ण गांव का माहौल बड़ा ही सुंदर और शुद्ध लगता आपसी भाई चारे के लिए एक मिसाल पेश करते हैं।

Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram WhatsApp Email
Previous Articleभौतिक सुख से आध्यात्मिक विकास रुकता जा रहा : निर्मला बहन
Next Article पारिवारिक कलह में विवाहिता ने किया विषपान, मौत

Related Posts

झारखंड

कबाड़ से कंचन बनाने वाले हुनर को मिला प्रमोशन, CCL के PR हेड आलोक गुप्ता बने GM

September 21, 2026
Headlines

रामगढ़ में चार थानेदार लाइन क्लोज, कई इधर से उधर… देखें लिस्ट

September 21, 2026
Headlines

एसपी गौरव की खरी-खरी… जनता को चक्कर कटवाए तो नपेंगे अफसर, तुरंत निपटाएं फाइलें

September 21, 2026
Advertisement
auto
  • Facebook
  • Twitter
  • Telegram
  • WhatsApp

Latest Post

कबाड़ से कंचन बनाने वाले हुनर को मिला प्रमोशन, CCL के PR हेड आलोक गुप्ता बने GM

September 21, 2026

बाढ़ पीड़ितों के लिए आगे आए मंत्री रामकृपाल यादव, सीएम राहत कोष में दिया अपना वेतन

September 21, 2026

गया IMC पर बियाडा सख्त, MD बोले- समय पर पूरा हो काम, अतिक्रमण पर चलायें बुलडोजर

September 21, 2026

गांव के छोटे उद्योगों को प्राथमिकता से दें लोन, साइबर सुरक्षा से न हो समझौता : मंत्री

September 21, 2026

बिहार में घर बनाना होगा आसान, आ रहा नया बिल्डिंग बायलॉज

September 21, 2026
© 2026 News Samvad. Designed by Launching Press.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.