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News Samvad: करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ महिलाएं सुबह से निर्जला व्रत रखती हैं। दिनभर बिना कुछ खाए-पिए रहने के बाद शाम को भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करती हैं। इसके बाद सभी को चांद निकलने का इंतजार रहता है। चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने और पति के हाथ से पानी पीने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है।
लेकिन कई बार मौसम खराब होने, आसमान में बादल छाए रहने या आसपास ऊंची इमारतें होने के कारण चांद दिखाई नहीं देता। ऐसे में महिलाओं के सामने सवाल खड़ा हो जाता है कि अगर चंद्रोदय का समय बीत जाए और चांद नजर न आए, तो क्या करें? क्या चंद्रमा के दर्शन किए बिना व्रत खोलना सही है? ऐसी स्थिति में पूजा कैसे करनी चाहिए? आइए जानते हैं कि इस बारे में धार्मिक परंपराओं में क्या मान्यताएं प्रचलित हैं।
29 अक्टूबर को करवा चौथ, अपने शहर में चंद्रोदय का समय जरूर देखें
इस साल करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। चंद्रमा निकलने का समय हर शहर में अलग-अलग हो सकता है। दिल्ली में चंद्रोदय रात 8:17 बजे और जयपुर में रात 8:28 बजे होने का अनुमान है। दूसरे शहरों में समय अलग हो सकता है। इसलिए महिलाओं को अपने शहर के पंचांग में चंद्रोदय का समय जरूर देख लेना चाहिए।
करवा चौथ की शाम महिलाएं पूजा की तैयारी करती हैं। भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करने के बाद व्रत की कथा सुनी जाती है। इसके बाद चांद निकलने का इंतजार किया जाता है। चंद्रमा दिखाई देने पर करवा या लोटे में जल लेकर अर्घ्य दिया जाता है। कई परिवारों में छलनी से पहले चांद और फिर पति का चेहरा देखने की परंपरा है। इसके बाद पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोला जाता है।
बादलों के कारण चांद न दिखे तो क्या करें?
अगर चंद्रोदय का समय हो गया है, लेकिन बादलों के कारण चांद दिखाई नहीं दे रहा है, तो सबसे पहले कुछ देर इंतजार करना चाहिए। कई बार चांद निकलने के बाद भी बादलों या धुंध के कारण उसके दर्शन नहीं हो पाते। ऐसे में खुले स्थान से आसमान देखने की कोशिश करें और अपने शहर में चंद्रोदय का समय भी जांच लें।
अगर काफी देर तक चांद नजर नहीं आता, तो परिवार की परंपरा के अनुसार चंद्रदेव का स्मरण करके पूजा की जा सकती है। कुछ धार्मिक परंपराओं में चंद्रमा की दिशा में मुख करके अर्घ्य देने की मान्यता है। हालांकि, चांद दिखाई नहीं देने की स्थिति में व्रत खोलने को लेकर सभी जगह एक जैसा नियम नहीं है। इसलिए अपने परिवार के बड़ों या पुरोहित से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
कुछ श्रद्धालु ऐसी स्थिति में भगवान शिव की पूजा करके व्रत खोलने का विकल्प भी अपनाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान हैं। हालांकि, यह तरीका भी सभी जगहों पर एक समान धार्मिक नियम के रूप में स्वीकार नहीं किया जाता। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा और मान्यता को ध्यान में रखकर ही निर्णय लेना चाहिए।
दूसरे शहर में दिख रहा हो चांद तो वीडियो कॉल का लेते हैं सहारा
कई बार एक शहर में बादल छाए रहते हैं, जबकि दूसरे शहर में चांद साफ दिखाई देता है। ऐसी स्थिति में कुछ महिलाएं दूसरे शहर में रहने वाले परिवार के सदस्यों या परिचितों से वीडियो कॉल करके चांद के दर्शन करने का विकल्प अपनाती हैं। कुछ जगहों पर चांद की तस्वीर मंगवाने का तरीका भी देखने को मिलता है।
हालांकि, वीडियो कॉल या तस्वीर के जरिए चांद देखने को सभी धार्मिक परंपराओं में मान्य नियम नहीं माना जाता। इसलिए इस विकल्प को अपनाने से पहले अपने घर के बड़ों या पुरोहित से सलाह लेना उचित रहेगा।
करवा चौथ पर चांद दिखाई नहीं देने से परेशान होने की जरूरत नहीं है। पहले चंद्रोदय के समय का पता करें और कुछ देर इंतजार करें। इसके बाद भी चांद न दिखे, तो अपनी पारिवारिक मान्यता के अनुसार पूजा और व्रत खोलने का निर्णय लें।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा के नियम अलग हो सकते हैं। किसी विशेष धार्मिक नियम की पुष्टि के लिए संबंधित पुरोहित या धार्मिक विशेषज्ञ से सलाह लें।
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