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Ranchi : सितंबर का महीना शुरू होते ही गांव-गांव में आस्था का माहौल बनने लगता है। गंगा किनारे, तालाबों और पोखरों के घाटों पर भीड़ जुटती है। हाथों में तिल, कुश और जल लेकर बेटे-बेटियां अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं। यह वही पितृपक्ष का समय होता है, जब माना जाता है कि पितृलोक से पूर्वज धरती पर आते हैं और देखते हैं कि उनके परिजन उन्हें याद कर रहे हैं या नहीं।
पितरों के लिए समर्पित पखवाड़ा
शास्त्रों में पितृपक्ष को पूर्वजों की आत्मा की शांति का पर्व कहा गया है। इस वर्ष पितृपक्ष 7 सितंबर 2025 से शुरू होकर 21 सितंबर 2025 तक रहेगा। मान्यता है कि इस दौरान श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से न सिर्फ पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है, बल्कि परिवार पर सुख-समृद्धि और सौभाग्य की वर्षा होती है।
घाटों पर जुटेगी भीड़
पितृपक्ष के दिनों में प्रातःकाल से ही नदियों के घाटों पर लोगों की भीड़ जुटने लगती है। लोग जल अर्पण करते हैं, पिंडदान करते हैं और ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं। घर-घर में कच्चा भोजन बनता है और श्रद्धापूर्वक पितरों को अर्पित किया जाता है। कई जगहों पर मेलों जैसा दृश्य देखने को मिलता है।
प्रमुख तिथियां
इस बार प्रतिपदा श्राद्ध 8 सितंबर को होगा और सर्वपितृ अमावस्या, जिसे सबसे बड़ा दिन माना जाता है, 21 सितंबर को पड़ेगी। जिन परिवारों को अपने पितरों की सही तिथि मालूम नहीं होती, वे अमावस्या के दिन तर्पण करते हैं।
- प्रतिपदा श्राद्ध – 8 सितंबर
- द्वितीया श्राद्ध – 9 सितंबर
- तृतीया श्राद्ध – 10 सितंबर
- चतुर्थी श्राद्ध – 11 सितंबर
- पंचमी श्राद्ध – 12 सितंबर
- षष्ठी श्राद्ध – 12 सितंबर
- सप्तमी श्राद्ध – 13 सितंबर
- अष्टमी श्राद्ध – 14 सितंबर
- नवमी श्राद्ध – 15 सितंबर
- दशमी श्राद्ध – 16 सितंबर
- एकादशी श्राद्ध – 17 सितंबर
- द्वादशी श्राद्ध – 18 सितंबर
- त्रयोदशी श्राद्ध – 19 सितंबर
- चतुर्दशी श्राद्ध – 20 सितंबर
- सर्वपितृ अमावस्या – 21 सितंबर
सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व है। इस दिन वे लोग भी श्राद्ध करते हैं, जिन्हें अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है।
क्यों है खास पितृपक्ष
मान्यता है कि श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्न होकर वंश में सुख-शांति, स्वास्थ्य, संतान सुख और दीर्घायु का आशीर्वाद देते हैं। इस दौरान यदि कोई श्राद्ध कर्म नहीं करता तो पितृ दोष लग सकता है, जिससे जीवन में बाधाएं आती हैं।
नहीं होते मांगलिक कार्य
पितृपक्ष के पूरे 15 दिनों में विवाह, गृहप्रवेश, नया कारोबार या अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। यह समय केवल पूर्वजों को समर्पित होता है। इस तरह आने वाले दिनों में बिहार और पूरे देश के गांव-शहरों में पितृपक्ष का माहौल छाएगा। घाटों पर भक्ति और आस्था का संगम दिखेगा और घर-घर से पितरों के नाम पुकारती आवाजें सुनाई देंगी।
कब से कब तक रहेगा पितृपक्ष 2025
वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा से पितृपक्ष की शुरुआत होती है और आश्विन मास की अमावस्या को इसका समापन होता है। इस वर्ष पितृपक्ष 7 सितंबर 2025 से शुरू होकर 21 सितंबर 2025 तक चलेगा।
पितृपक्ष का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि पितृपक्ष में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दौरान अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन कराना और उन्हें दक्षिणा व वस्त्र देना पुण्यकारी माना गया है।
कहा जाता है कि पितृपक्ष में किए गए ये कर्म परिवार को स्वास्थ्य, समृद्धि, लंबी आयु और संतान सुख प्रदान करते हैं।
इस दौरान क्या न करें
पितृपक्ष के पूरे 15 दिनों में विवाह, गृहप्रवेश, नया कारोबार शुरू करने या अन्य किसी भी मांगलिक कार्य का आयोजन नहीं किया जाता। इस अवधि को केवल पितरों की स्मृति और उन्हें संतुष्ट करने का समय माना जाता है। इस तरह पितृपक्ष 2025 एक बार फिर से परिवारों के लिए अपने पूर्वजों को स्मरण करने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का शुभ अवसर लेकर आ रहा है।
नोट : ज्योतिषाचार्य पंडित अनुराग तिवारी से विस्तृत जानकारी लेने के लिए +917380965553 पर संपर्क किया जा सकता है। समय – शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक।
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