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Ranchi : इस साल की अंतिम अमावस्या यानी पौष अमावस्या 19 दिसंबर को है। हिंदू धर्म में इसे अत्यंत पुण्यकारी तिथि माना जाता है। इस दिन पितरों के तर्पण, श्राद्ध, दान और पूजा करने से पितृ दोष समाप्त होता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है। बनारस के जानेमाने ज्योतिषाचार्य पंडित अनुराग तिवारी ने बताया कि पौष अमावस्या पूरी तरह पितरों को समर्पित होती है। इस दिन विधिपूर्वक किए गए तर्पण और पिंडदान से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।
सूर्य देव की पूजा का महत्व
पौष मास के स्वामी सूर्य देव हैं। अमावस्या के दिन सूर्य को अर्घ्य देने और पूजा करने से स्वास्थ्य, समृद्धि और ऊर्जा मिलती है। इसके साथ ही घर-परिवार में आने वाली बाधाएं और आर्थिक संकट दूर होते हैं।
अमावस्या तिथि और शुभ समय
पौष अमावस्या 19 दिसंबर को सुबह 04:59 बजे शुरू होकर 20 दिसंबर को सुबह 07:12 बजे समाप्त होगी। मुख्य धार्मिक कार्य 19 दिसंबर को ही किए जाएंगे।
दान और सेवा के शुभ उपाय
इस दिन गायों को हरा चारा, गुड़ और रोटी खिलाना, पक्षियों को दाना डालना और छत पर पानी रखना पुण्यकारी माना गया है। जरूरतमंदों, ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है। अपनी क्षमता अनुसार अन्न, वस्त्र, कंबल या काले तिल का दान करने से विशेष फल मिलता है।
पीपल पूजा और पितृ दोष शांति
शास्त्रों के अनुसार पीपल वृक्ष में देवी-देवताओं और पितरों का वास होता है। अमावस्या के दिन पीपल के जड़ों में जल अर्पित करें और संध्या समय सरसों के तेल का दीपक जलाएं। दीपक जलाकर 5, 7 या 11 परिक्रमा करने से पितृ दोष शांत होता है।
पितृ स्तोत्र पाठ लाभकारी
घर के शांत स्थान पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितृ स्तोत्र या पितृ चालीसा का पाठ करना लाभकारी बताया गया है। पौष मास में गर्म कपड़ों का दान करने से सूर्य और शनि देव दोनों प्रसन्न होते हैं। साल की यह आखिरी अमावस्या धार्मिक अनुष्ठानों और दान-पुण्य के लिए उत्तम अवसर है, जिससे पितरों की शांति और घर में सुख-समृद्धि सुनिश्चित होती है।

