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Kanpur : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब देश का किसान आर्थिक रूप से मजबूत और स्वस्थ होगा। उन्होंने किसानों से रासायनिक खेती की जगह प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है। प्रदेश के 34 जिलों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।कानपुर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा संकट और बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में प्राकृतिक खेती किसानों और समाज दोनों के लिए बेहतर विकल्प बनकर सामने आई है।
किसानों को योजनाओं का मिला बड़ा सहारा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों को उनकी उपज का लागत मूल्य से कम से कम डेढ़ गुना दाम सुनिश्चित किया गया है। इसके अलावा सॉइल हेल्थ कार्ड, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। इन योजनाओं का लाभ लाखों किसानों तक पहुंचा है।
रासायनिक खेती से बढ़ रही हैं स्वास्थ्य समस्याएं
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किडनी, लीवर, ब्लड प्रेशर और मधुमेह जैसी बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी के पीछे खाद्यान्न में रसायनों की बढ़ती मात्रा भी एक महत्वपूर्ण कारण है। प्राकृतिक खेती इस समस्या का प्रभावी समाधान बन सकती है।
गंगा किनारे और बुंदेलखंड पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के 34 जिलों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की योजना पर काम चल रहा है। इनमें गंगा तट के 27 जिले और बुंदेलखंड क्षेत्र के 7 जिले शामिल हैं। सरकार किसानों के उत्पादों के प्रमाणन, पैकेजिंग और विपणन की व्यवस्था भी विकसित कर रही है, ताकि उन्हें बाजार में बेहतर पहचान और उचित मूल्य मिल सके।
गो-आधारित कृषि को मिलेगा नया बल
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्राकृतिक खेती भारतीय संस्कृति और गो-आधारित कृषि परंपरा से जुड़ी हुई है। प्रदेश में इस समय 7700 से अधिक गोशालाओं में करीब 14 लाख गोवंश संरक्षित हैं। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत किसानों को गोवंश पालन के लिए आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि गोबर और कृषि अपशिष्ट का उपयोग खेती के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन में भी किया जा सकता है।
2047 के विकसित भारत की नींव बनेगा किसान
मुख्यमंत्री ने कहा कि पराली, गोबर और कृषि अवशेषों से बायोगैस, सीएनजी और एथेनॉल तैयार किया जा रहा है, जिससे किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में किसान सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कानपुर तभी विकसित होगा, जब यहां का किसान, व्यापारी, कारीगर और युवा समृद्ध होगा। प्राकृतिक खेती इस दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगी।
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