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Varanasi : सीएम योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के नमोघाट पर काशी तमिल संगमम के चौथे संस्करण का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से यूपी सरकार ने अपने वोकेशनल शिक्षा कार्यक्रम में तमिल, कन्नड़, मलयालम, तेलुगू, मराठी और बंगाली भाषाओं को शामिल किया है। छात्र अपनी पसंद की भाषा चुन सकेंगे और उसका पूरा खर्च सरकार उठाएगी।
तमिल भाषा को दिया नया मंच
मुख्यमंत्री ने बताया कि हर साल उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामेश्वरम, मदुरै और कन्याकुमारी जाते हैं। इस लिए पर्यटन विभाग विशेष रियायती यात्रा कार्यक्रम शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि काशी तमिल संगमम अब भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रमुख प्रतीक बन चुका है।
काशी और तमिल परंपरा का पुराना संबंध
योगी ने तमिल भाषा में अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि काशी और तमिल परंपरा के केंद्र में भगवान शिव हैं। आदि शंकराचार्य ने उत्तर और दक्षिण भारत के बीच आध्यात्मिक सेतु को मजबूत किया था। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से दोनों क्षेत्रों की सांस्कृतिक और शैक्षिक साझेदारी और सशक्त होगी।

उपराष्ट्रपति ने वर्चुअल संदेश भेजा
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने वीडियो संदेश में कहा कि 2022 में शुरू हुआ काशी तमिल संगमम राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच बन गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री के मन की बात में कही टिप्पणी को याद किया कि यह संगम दुनिया की सबसे पुरानी भाषा और सबसे प्राचीन शहर का मिलन है। उन्होंने इस वर्ष की थीम आइए तमिल सीखें को महत्वपूर्ण बताया और 50 हिंदीभाषी शिक्षकों द्वारा 1,500 बच्चों को तमिल सिखाने की पहल की सराहना की।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का संबोधन
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि काशी ज्ञान और अध्यात्म की धरती है और तमिलनाडु के मंदिरों में भी काशी विश्वनाथ की उपस्थिति दोनों संस्कृतियों के गहरे संबंध को दिखाती है। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और भाषायी विविधता ही उसकी ताकत है।
कार्यक्रम में हुआ सम्मान और प्रदर्शनी का अवलोकन
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में अतिथियों के साथ समूह फोटो खिंचवाया और प्रदर्शनी के स्टॉल देखे। शंख वादन और स्वस्ति वाचन से अतिथियों का स्वागत किया गया। वेदमूर्ति देवव्रत रेखे और बालाजी बालू हरिदॉस को अंगवस्त्र और प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
कई प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि, केंद्रीय सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन, पुडुचेरी के उप राज्यपाल के कैलाशनाथन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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