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New Delhi : रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 और 5 दिसंबर को भारत आ रहे हैं। उनकी यात्रा से पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने संकेत दिए कि दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हो सकते हैं। इनमें एसयू-57 लड़ाकू विमान, एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम, जेट इंजन तकनीक साझा करना और छोटे परमाणु संयंत्र शामिल हैं।
द्विपक्षीय व्यापार पर अमेरिकी टैरिफ का असर
पेस्कोव ने कहा कि भारत को रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका की ओर से ऊंचे टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि रूस भारत के साथ ऐसा व्यापार ढाँचा तैयार करना चाहता है जिसे किसी तीसरे देश के प्रभाव से नुकसान न हो। रूस और भारत राष्ट्रीय मुद्राओं में लेनदेन बढ़ाकर व्यापार को सुरक्षित बनाना चाहते हैं।
भारत रूस व्यापार संतुलन सुधारने पर चर्चा
रूस और भारत के बीच व्यापार फिलहाल करीब 68.7 अरब डॉलर है, जिसमें भारत का निर्यात केवल करीब 5 अरब डॉलर है। पेस्कोव ने स्वीकार किया कि व्यापार रूस के पक्ष में झुका हुआ है। उन्होंने कहा कि रूस भारत से आयात बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है और इस दिशा में विशेष बैठक भी होगी।
रक्षा सहयोग में नए अध्याय की उम्मीद
पेस्कोव ने ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग का भविष्य मजबूत है। उन्होंने कहा कि रूस भारत को जेट इंजन ही नहीं बल्कि उनकी तकनीक भी देना चाहता है, ताकि दोनों देश मिलकर निर्माण कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि एस-400 और एसयू-57 पर चर्चा यात्रा के दौरान संभव है।
परमाणु ऊर्जा में छोटे रिएक्टरों पर बातचीत
उन्होंने कहा कि रूस भारत को छोटे और लचीले परमाणु रिएक्टर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव देगा। रूस कुडनकुलम परमाणु संयंत्र परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए भी उत्सुक है।
आतंकवाद पर संयुक्त प्रयास की जरूरत
हाल के दिल्ली विस्फोटों की निंदा करते हुए पेस्कोव ने कहा कि आतंकवाद से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। रूस और भारत इस मुद्दे पर पहले से ही एक-दूसरे के करीबी साझेदार हैं।
यूक्रेन युद्ध पर भारत की भूमिका की सराहना
पेस्कोव ने कहा कि रूस प्रधानमंत्री मोदी के शांतिपूर्ण रुख का आदर करता है। उन्होंने कहा कि रूस अमेरिका की शांति योजना को भी देख रहा है, लेकिन पश्चिमी देश युद्ध समाप्त करने की कोशिशों को महत्व नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत रूस की बात को ध्यान से सुनता और समझता है।
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