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Lucknow : सुबह की कंपकंपाती ठंड, भारी बारिश में भीगते जूते और मैदान पर बहाया गया कई लीटर पसीना। सालों की इस कड़ी तपस्या का फल आखिरकार लखनऊ के मंच पर दिखा, जब खेल के मैदान के 470 रणबांकुरों के हाथों में उत्तर प्रदेश पुलिस का नियुक्ति पत्र थमा। यह सिर्फ एक सरकारी नौकरी का दस्तावेज नहीं था, बल्कि खेल की जर्सी से पुलिस की खाकी वर्दी तक पहुंचने का एक यादगार पड़ाव था। कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने सीधे और साफ शब्दों में कहा कि यह नियुक्ति किसी सरकार का अहसान या अनुकंपा नहीं है। यह हर उस खिलाड़ी के अनुशासन, टीम भावना और मेहनत का हक है, जिसने संसाधनों की कमी के बावजूद कभी मैदान नहीं छोड़ा। सीएम ने युवाओं को सोशल मीडिया के मोहजाल से बचने की नसीहत भी दी। उन्होंने कहा कि फोन पर रील्स देखने या बनाने से कुछ क्षणिक लाइक्स तो मिल सकते हैं, लेकिन खेल के मैदान में बहाया गया पसीना इंसान को एक पूरी नई जिंदगी देता है।
सिफारिश और लेन-देन का दौर खत्म, प्रतिभा बनी चयन का आधार
उत्तर प्रदेश में पहले ऐसा दौर भी रहा है जब खेलों में मेडल जीतने के बाद भी खिलाड़ियों को नौकरी के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। इस तस्वीर को बदलते हुए प्रदेश सरकार ने कुशल खिलाड़ी कोटे से सीधी भर्ती की राह खोली। चयनित 470 खिलाड़ियों में 303 युवक और 167 युवतियां शामिल हैं। इनमें 295 को नागरिक पुलिस में सिपाही, 43 को दरोगा और 132 को पीएसी में सिपाही पद पर जिम्मेदारी मिली है। सीएम ने बताया कि अब तक करीब एक हजार खिलाड़ियों को सीधी भर्ती से सेवा में लिया जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय फलक पर तिरंगा लहराने वाले 7 होनहारों को सीधे डिप्टी एसपी बनाया गया है, जिनमें हॉकी स्टार ललित उपाध्याय और राजकुमार पाल का नाम शामिल है। चयन प्रक्रिया पूरी तरह साफ-सुथरी रही, जहां न तो किसी सिफारिश का दखल था और न ही कोई लेन-देन। केवल और केवल मैदान का प्रदर्शन ही योग्यता का पैमाना बना।
माफिया से खाली कराई जमीन पर बने स्टेडियम, हर मंडल में स्पोर्ट्स कॉलेज
प्रदेश में खेलों को लेकर सोच किस तरह बदली है, इसका उदाहरण खाली कराई गई जमीनों पर दिखता है। जिस सरकारी और सार्वजनिक जमीन पर कभी भू-माफिया का कब्जा हुआ करता था, आज वहां बच्चों के दौड़ने के लिए ट्रैक और खेलने के लिए मैदान तैयार हो रहे हैं। गांव, ब्लॉक और जिला स्तर पर मिनी स्टेडियम बनाए जा रहे हैं। हर प्रशासनिक कमिश्नरी में आधुनिक स्पोर्ट्स कॉलेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तैयार किए जा रहे हैं, ताकि स्थानीय बच्चों को ट्रेनिंग के लिए बड़े शहरों की ओर न भागना पड़े। मेरठ में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर राज्य की पहली खेल यूनिवर्सिटी का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यूपी का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों के लिए खजाना खोलते हुए अब तक 200 करोड़ रुपये से अधिक की नकद पुरस्कार राशि बांटी जा चुकी है।
एक गांव गोद लेंगे खिलाड़ी, नशे के खिलाफ बनेंगे समाज का मजबूत चेहरा
पुलिस महकमे में शामिल हुए इन नए सिपाहियों और अफसरों को सीएम ने एक अनोखा और संवेदनशील जिम्मा सौंपा है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक को सुझाव दिया कि इन सभी 470 खिलाड़ियों को कम से कम एक-एक गांव गोद दिया जाए। यह व्यवस्था मिशन शक्ति की महिला बीट अधिकारियों की तर्ज पर काम करेगी। हफ्ते में एक दिन ये खिलाड़ी अपने गोद लिए गांव में जाएंगे और वहां के बच्चों व युवाओं को खेलों की बारीकियां सिखाएंगे। सीएम ने जोर देकर कहा कि आज के दौर में जब नशे का जाल युवाओं को घेर रहा है, खिलाड़ी ही सबसे बड़े रोल मॉडल बन सकते हैं। खिलाड़ी का हाथ पोडियम पर मेडल थामने के लिए उठना चाहिए, नशे की गर्त में जाने के लिए नहीं। जब ये खिलाड़ी वर्दी पहनकर मैदान में उतरेंगे, तो गांव का हर बच्चा मोबाइल स्क्रीन छोड़कर खेल के मैदान की ओर दौड़ेगा।
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