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New Delhi : लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान ‘ऑपरेशन महादेव’ को लेकर अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने तीन आतंकियों को मार गिराया है। मारे गए आतंकियों की पहचान सुलेमान, फैजल अफगान और जिब्रान के रूप में हुई है, जो लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों से जुड़े थे। गृह मंत्री ने बताया कि ये आतंकी पाकिस्तान के इशारे पर काम कर रहे थे और इन्होंने पहलगाम में निर्दोष नागरिकों की हत्या की थी। शाह ने कहा कि धर्म पूछकर लोगों की बेरहमी से हत्या की गई थी। उन्होंने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।
अमित शाह ने बताया कि 28 जुलाई को दाछीगाम के जंगलों में हुए इस ऑपरेशन में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। ऑपरेशन से पहले गहन निगरानी और खुफिया सूचनाएं जुटाई गई थीं। शाह के अनुसार, 22 मई को आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया और कार्रवाई को अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि घटनास्थल से बरामद हथियार और कारतूसों को एफएसएल जांच के लिए भेजा गया था, जिसमें पुष्टि हुई कि यही हथियार पहलगाम हमले में इस्तेमाल हुए थे। गृह मंत्री ने यह भी बताया कि 23 अप्रैल को एक उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक में यह तय किया गया था कि इन हत्यारों को किसी भी कीमत पर भागने नहीं दिया जाएगा।
आतंकियों के मारे जाने पर विपक्ष खुश क्यों नहीं?
शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि आतंकियों के मारे जाने की खबर सुनकर उन्हें लगा था कि विपक्ष खुश होगा, लेकिन उनके चेहरे पर उदासी दिखी। उन्होंने कहा कि आतंकवाद पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। केंद्र सरकार आतंकवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर कायम है और निर्दोषों की हत्या करने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
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