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Ranchi : राज्यसभा सांसद और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन (गुरुजी) का सोमवार को निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। बीते कुछ दिनों से उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। ब्रेन स्ट्रोक के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था। इसके कारण उनके शरीर के बाएं हिस्से में लकवा हो गया था। शिबू सोरेन लंबे समय से किडनी की बीमारी से पीड़ित थे और पिछले एक साल से डायलिसिस पर थे। उन्हें डायबिटीज और हृदय संबंधी समस्याएं भी थीं। उनकी बायपास सर्जरी भी हो चुकी थी। न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी और नेफ्रोलॉजी के डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही थी।
दिशोम गुरू के निधन की जानकारी CM हेमंत सोरेन ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया X पर साझा की है। उन्होंने लिखा… “आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं। आज मैं शून्य हो गया हूँ…”
आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं।
आज मैं शून्य हो गया हूँ…
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) August 4, 2025
संघर्षों से भरा रहा जीवन
शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को झारखंड के रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड स्थित नेमरा गांव में हुआ था। मात्र 13 साल की उम्र में उनके पिता की महाजनों ने हत्या कर दी थी। इसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और आदिवासी समाज को एकजुट कर महाजनों के खिलाफ संघर्ष का रास्ता चुना।
वर्ष 1970 में उन्होंने ‘धान कटनी आंदोलन’ शुरू किया और सूदखोर महाजनों के खिलाफ खुलकर सामने आए। इस दौरान कई बार उनकी जान पर भी खतरा आया। एक बार महाजनों के गुंडों से बचने के लिए उन्होंने उफनती बराकर नदी में बाइक समेत छलांग लगा दी और दूसरी ओर तैरकर निकल आए। इस घटना के बाद उन्हें ‘दिशोम गुरु’ कहा जाने लगा, जिसका संथाली भाषा में मतलब है – देश का गुरु।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक
शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक संरक्षक थे। वे यूपीए सरकार में कोयला मंत्री भी रहे, लेकिन चिरूडीह हत्याकांड में नाम आने के बाद उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
तीन बार बने मुख्यमंत्री, लेकिन कार्यकाल रहा छोटा
शिबू सोरेन तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने, लेकिन उनका कार्यकाल कभी लंबा नहीं रहा।
- पहली बार, वे 2 मार्च 2005 को मुख्यमंत्री बने, लेकिन 10 दिन बाद 12 मार्च को इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि वे बहुमत साबित नहीं कर सके।
- दूसरी बार, 27 अगस्त 2008 को उन्होंने दोबारा मुख्यमंत्री पद संभाला, लेकिन विधायक न होने की वजह से उन्हें छह महीने में चुनाव जीतना था।
तमाड़ सीट से उपचुनाव लड़ा लेकिन हार गए, और 18 जनवरी 2009 को इस्तीफा देना पड़ा। - तीसरी बार, 30 दिसंबर 2009 को फिर से मुख्यमंत्री बने, लेकिन इस बार भी सिर्फ पांच महीने तक पद पर रह सके और 31 मई 2010 को इस्तीफा दे दिया।
अपने तीन कार्यकाल में शिबू सोरेन को कुल मिलाकर सिर्फ 10 महीने 10 दिन तक मुख्यमंत्री पद संभालने का अवसर मिला।
झारखंड की राजनीति में अहम नाम
शिबू सोरेन झारखंड की राजनीति के एक मजबूत स्तंभ थे। उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा और उन्होंने आदिवासी समाज के हक के लिए कई आंदोलन किए। उनके निधन से झारखंड की राजनीति में एक युग का अंत हो गया है।
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