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Gayaji : राष्ट्रपति ने विष्णुपद मंदिर परिसर में अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के साथ विधिवत पिंडदान किया। गर्भगृह में जाकर उन्होंने पूजा-अर्चना की और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। यह पल श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और भावपूर्ण रहा।
सुरक्षा के तगड़े इंतजाम
राष्ट्रपति के पिंडदान के लिए जिला प्रशासन ने मंदिर परिसर में विशेष सुरक्षा और इंतज़ाम किए। एल्यूमिनियम फैब्रिकेटेड हॉल में तीन अलग-अलग कक्ष बनाए गए, जिनमें से एक में राष्ट्रपति ने अपने परिवार के साथ पिंडदान किया। इस दौरान गयापाल पुरोहित राजेश लाल कटरियार के नेतृत्व में विधिवत अनुष्ठान संपन्न हुआ।
श्रद्धालुओं की भागीदारी और धार्मिक महत्व
गया के श्रद्धालुओं ने राष्ट्रपति के आगमन को देखकर अपनी आस्था और उत्साह का अनुभव किया। 14वें श्राद्ध दिन का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि तर्पण और स्नान के माध्यम से पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना की जाती है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पिंडदान ने इस धार्मिक आयोजन को और भी गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक बना दिया, जिससे श्रद्धालुओं में उत्साह और विश्वास दोगुना हो गया।
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