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Lohardaga : लोहरदगा जिले का तान गांव इन दिनों दहशत और मातम के साये में है। बीती रात यहां हाथियों ने ऐसा तांडव मचाया कि पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। पहाड़ों से उतरकर आए 18 हाथियों के झुंड ने गांव में प्रवेश किया और देखते ही देखते खुशियों को मातम में बदल दिया। कई घरों को तहस-नहस कर दिया। किसी की सांसें छीन ली, तो किसी के बेतरह जख्मी कर दिया।
नए घर की चौखट पर टूटी जिंदगी
करीब 60 बरस के सीताराम उरांव का सपना था कि वे अपने नए बने घर में चैन की नींद सो सकें। लेकिन किसे पता था कि यह घर ही उनकी अंतिम मंजिल बन जाएगा। हाथियों ने पहले मगरा उरांव का घर रौंदा और फिर सीताराम के घर पर धावा बोल दिया। वे भाग भी नहीं सके। हाथियों ने उन्हें सूंड़ में लपेटा और 100 मीटर दूर ले जाकर बेरहमी से कुचल डाला। परिवारवालों की मजबूरी देखिए कि शव को टोकरी में डालकर घर लाना पड़ा। इस हादसे के बारे में जिस किसी ने भी देखा-सुना, उसकी चीख निकल गयी। वहीं, बुजुर्ग की दर्दनाक मौत के बाद पूरा गांव खामोशी में डूब गया।
छत पर भागकर बचाई जान
हमले के वक्त गांव के अमर भगत और बिलतु भगत छत पर चढ़कर किसी तरह अपनी जान बचा पाए। वहीं, ग्रामीण बताते हैं कि यह पहली बार नहीं है जब हाथियों ने कहर बरपाया हो। पिछले दो दिनों से हाथियों का झुंड लगातार गांव में घुसकर तबाही मचा रहा है। बुधन महली, मंटू उरांव, सारू उरांव, चोरों उरांव और भीखाराम उरांव जैसे कई परिवार अपने टूटे-फूटे घरों के मलबे के बीच बेबस खड़े हैं।
दहशत और आक्रोश में गांव
लगातार हमलों से तान गांव का हर परिवार डरा हुआ है। बच्चे मां की गोद में सहमे हैं, बुजुर्ग रातभर जाग रहे हैं और औरतों की आंखों में सुरक्षा की चिंता झलक रही है। ग्रामीणों का आक्रोश भी चरम पर है। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
प्रशासन ने वन विभाग को दिये सख्त निर्देश
घटना के बाद जिला प्रशासन ने वन विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं। टीम गांव पहुंच चुकी है और हालात पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन ग्रामीणों का मानना है कि केवल कार्रवाई का आश्वासन काफी नहीं होगा, बल्कि उन्हें सुरक्षा का ठोस भरोसा चाहिए।
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