अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Sitamarhi (Bihar) : शरद ऋतु की ठंडी हवा, ढोल-नगाड़ों की थाप और पूजा पंडालों में उमड़ी भीड़… बिहार में दुर्गा पूजा का माहौल पूरे शबाब पर है। ऐसे में हर गली-मोहल्ले का पंडाल अपनी-अपनी थीम और साज-सज्जा से लोगों को आकर्षित कर रहा है। लेकिन पुनौरा मध्य विद्यालय प्रांगण का मां शक्ति पूजा समिति का पंडाल कुछ अलग है। यहां न केवल आस्था की प्रतिमाएं सजी हैं, बल्कि लोकतंत्र का जीवंत संदेश भी दिया गया है।
देवी-देवताओं की ‘चुनावी पारी’
इस पंडाल में प्रवेश करते ही सबसे पहले श्रद्धालुओं की नजर एक ईवीएम मशीन पर जाती है। साधारण सी दिखने वाली इस मशीन में जब लोग करीब से झांकते हैं तो हैरान रह जाते हैं। इस ईवीएम में 17 देवी-देवताओं के नाम क्रमवार दर्ज हैं और उनके सामने अलग-अलग चुनावी चिह्न बने हुए हैं। मानो सचमुच देवता इस बार मतदाता की अदालत में खड़े हों।
भगवान गणेश के सामने फरसा का निशान, भगवान शंकर के सामने दीपक, भगवान विष्णु को चक्र, भगवान श्रीराम को धनुष-बाण, श्रीकृष्ण को बांसुरी, मां सरस्वती को वीणा, मां दुर्गा को त्रिशूल और भगवान हनुमान को गदा। हर नाम के आगे दिया गया चुनावी चिह्न दर्शकों को मुस्कुराने और सोचने पर मजबूर करता है।
आरक्षण का संदेश
झांकी की एक खास बात यह भी है कि इसमें देवियों को खास स्थान दिया गया है। 17 उम्मीदवारों में से 6 जगह देवियों की हैं। आयोजकों ने इसे महिला सशक्तिकरण और आरक्षण का प्रतीक माना है। “हम चाहते थे कि आस्था के साथ-साथ समाज का संदेश भी पंडाल से मिले। महिला आरक्षण कानून देश में लागू हुआ है, तो हमने भी इस झांकी में उसका प्रतिबिंब डाला है।” – समिति के एक सदस्य ने गर्व से बताया।
नोटा और वीवीपैट का समावेश
यहां सिर्फ देवी-देवताओं की उम्मीदवारी ही नहीं, बल्कि मतदान प्रक्रिया का पूरा सेटअप दिखाया गया है। ईवीएम के अंतिम यानी 18वें स्थान पर नोटा (None of the Above) का विकल्प रखा गया है। यानी अगर किसी श्रद्धालु को कोई देवता पसंद नहीं आता तो ‘इनमें से कोई नहीं’ भी चुना जा सकता है।
इतना ही नहीं, पंडाल में वीवीपैट मशीन भी लगाई गई है। वोट डालने के बाद मशीन से निकली पर्ची पर नाम देखकर लोग समझते हैं कि मतदान प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है। यह दृश्य बच्चों और युवाओं को सबसे ज्यादा आकर्षित कर रहा है।
क्या बोल गये श्रद्धालु…
पंडाल में हर आने वाला व्यक्ति इस अनोखी झांकी को देख ठहर जाता है। स्थानीय निवासी पंकज कुमार कहते हैं – “हमने बहुत से पूजा पंडाल देखे हैं, लेकिन ऐसा पहली बार देखा जहां ईवीएम के जरिए आस्था और लोकतंत्र को जोड़ा गया है। यह हमें याद दिलाता है कि पूजा जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी है हमारा मताधिकार।”
वहीं, एक कॉलेज छात्रा बताती हैं – “यहां आकर सेल्फी लेना तो जरूरी है, लेकिन उससे भी बड़ा संदेश है कि वोट डालना कितना अहम है। मुझे लगता है इस पंडाल ने युवाओं को सीधा लोकतंत्र से जोड़ दिया है।”
बच्चों के बीच यह पंडाल किसी खेल की तरह है। वे ईवीएम पर बटन दबाकर देखते हैं और हंसी-मजाक करते हैं – “मैंने श्रीराम को वोट दिया, मैंने मां दुर्गा को।” बच्चों की मासूमियत और लोकतंत्र की गंभीरता का यह संगम अनोखा ही दृश्य पेश करता है।
आस्था और लोकतंत्र का अनोखा मेल
त्योहारों में पंडाल हमेशा से सामाजिक संदेश देते आए हैं। कहीं बेटी बचाओ का संदेश होता है, कहीं स्वच्छता का। लेकिन ईवीएम झांकी वाला यह पंडाल अनोखा है, क्योंकि यह आस्था को सीधे लोकतंत्र से जोड़ता है। मां दुर्गा की शक्ति और मतदान की शक्ति – दोनों का संगम यहां एक साथ दिखता है। पंडाल की सजावट में चमकदार लाइटें, फूलों की झालर और देवी की प्रतिमाओं के बीच जब यह ईवीएम रखी हुई दिखती है, तो लगता है जैसे देवी-देवता भी इस बार मतदान का हिस्सा बन गए हों।
चुनावी मौसम की आहट
बिहार में अगले माह विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने की संभावना है। ऐसे में ईवीएम वाला यह पंडाल लोगों के बीच चुनावी माहौल को और रोचक बना रहा है। लोग यहां से निकलते-निकलते सिर्फ आशीर्वाद ही नहीं, बल्कि मतदान का महत्व भी लेकर जाते हैं।
पंडाल का संदेश
इस अनोखे पंडाल का सबसे बड़ा आकर्षण यही है कि यह पूजा की आस्था को लोकतंत्र के कर्तव्य से जोड़ता है।
यह पंडाल हमें बताता है कि जैसे हम देवी-देवताओं की आराधना में पूरी श्रद्धा दिखाते हैं, वैसे ही हमें मतदान के समय भी पूरे जिम्मेदारी से अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए।
इसे भी पढ़ें : बिहार में महानवमी और विजयादशमी के रोज भी होगी मूसलाधार बारिश

