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Latehar : लातेहार की सुबह आम दिनों जैसी ही थी… अस्पतालों में मरीजों की लाइनें, फाइलों का ढेर और सरकारी प्रक्रिया की वही धीमी रफ्तार। लेकिन सोमवार की सुबह कुछ अलग थी। स्वास्थ्य विभाग के एक छोटे से कमरे में ईमानदारी और भ्रष्टाचार के बीच जंग चल रही थी। यहां सदर प्रखंड स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत एक ANM (सहायक नर्स मिडवाइफ) कई दिनों से अपने कॉन्ट्रैक्ट को रेगुलर कराने की कोशिश कर रही थी। लेकिन फाइल वहीं की वहीं पड़ी थी। कारण… ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर (BPM) अजय भारती की मांग। कहा गया, “काम तो हो जाएगा, लेकिन पहले 10 हजार रुपये देने होंगे।” कई दिन तक चुप रहने के बाद ANM ने हिम्मत जुटाई। उसने फैसला किया कि अब यह अन्याय और रिश्वतखोरी नहीं चलेगी। और वो पहुंची पलामू ACB यानी एंटी करप्शन ब्यूरो के दफ्तर।
ACB ने बिछाया जाल
शिकायत पर ACB की टीम ने तुरंत कार्रवाई की योजना बनाई। तय हुआ कि एएनएम पहले चरण में 5 हजार रुपये देगी, बाक़ी रकम काम पूरा होने के बाद। जैसे ही अजय भारती ने पैसे अपने हाथ में लिए, एसीबी की टीम कमरे में दाखिल हुई। चंद सेकंड के भीतर “साहब! एसीबी!” की आवाज़ गूंजी और विभाग का वह कमरा अचानक सन्नाटे में डूब गया।
कार्रवाई के बाद खलबली
गिरफ्तारी की खबर आग की तरह फैल गई। धर्मपुर स्थित उसके घर की भी तलाशी ली गई। फाइलों और कागजों की जांच की गई।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में खौफ और चर्चा दोनों है… “अब तो कोई रिश्वत मांगने से पहले सोचेगा।”
हमें लिखित सूचना नहीं मिली : सिविल सर्जन
लातेहार सिविल सर्जन डॉ. राजमोहन खलखो ने पुष्टि की कि BPM अजय भारती की गिरफ्तारी की सूचना मिली है, पर अभी तक एसीबी की ओर से औपचारिक रिपोर्ट नहीं आई है।
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