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Ranchi : राजधानी रांची के जैप-1 ग्राउंड में गुरुवार की दोपहर कुछ अलग थी। चारों ओर रंग-बिरंगी झालरें, दीयों की चमक और खुशियों की गूंज। लेकिन इस चकाचौंध के बीच एक गहरी भावना भी थी… सेवा की, संवेदना की और समाज को साथ लेकर चलने की।
यही था “इंडियन पुलिस सर्विस ऑफिसर्स वाइव्स एसोसिएशन (इप्सोवा)” के तीन दिवसीय दिवाली मेले का असली मकसद।

सीएम हेमंत और विधायक कल्पना बने खुशियों के साक्षी
सीएम हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने इस भव्य मेले का उद्घाटन किया। दीप जलाते हुए मुख्यमंत्री के चेहरे पर मुस्कान थी, और उनके शब्दों में समाज के प्रति जिम्मेदारी की झलक। उन्होंने कहा कि इप्सोवा कोई नया नाम नहीं है। यह संस्था समाज के दबे-कुचले और वंचित वर्ग के लोगों को जोड़ने का माध्यम बन चुकी है और यह सिलसिला निरंतर जारी है। ऐसे प्रयास झारखंड की पहचान हैं। मैं इप्सोवा को उसके सामाजिक सरोकार के लिए बधाई देता हूं।
इससे पहले मेले में मौजूद लोगों ने तालियों से उनका स्वागत किया। मंच के सामने बच्चे रंगोली बना रहे थे, और पुलिस परिवार की महिलाएं पारंपरिक झारखंडी परिधान में मुस्कुराती हुई आगंतुकों का स्वागत कर रही थीं।

नए लक्ष्यों की ओर बढ़ता कदम
सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि जैसे पुलिस महकमा लोगों की सुरक्षा का जिम्मा निभाता है, वैसे ही इप्सोवा समाज के प्रति अपने मानवीय दायित्व को निभा रहा है। उन्होंने कहा… “ऐसे मेलों से समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है कि हम सब मिलकर जरूरतमंदों को अपने साथ खड़ा कर सकते हैं। यही असली त्योहार है, जब खुशियां सबके बीच बांटी जाएं।”
संवेदना की यह रोशनी जारी रहे…
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन का समापन एक प्रेरक बात से किया… अगर हम सब मिलकर किसी एक जरूरतमंद को भी आगे बढ़ा सकें, तो यही हमारी सबसे बड़ी दिवाली होगी। इप्सोवा की इस पहल ने साबित किया कि रांची सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने वाली संवेदनाओं की धरती है, जहां रोशनी सिर्फ घरों में नहीं, बल्कि उम्मीदों में भी जलती है।

रांची के लोगों के लिए यादगार अनुभव
दिवाली मेले में झारखंडी लोकनृत्य, बच्चों की पेंटिंग प्रतियोगिता, और हस्तशिल्प प्रदर्शनी ने रांचीवासियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर स्टॉल पर एक कहानी थी — मेहनत की, उम्मीद की और अपने हुनर को पहचान दिलाने की। जैसे ही शाम ढली, दीयों की कतारें मैदान में चमक उठीं, मानो इप्सोवा का हर दीपक किसी जरूरतमंद के जीवन को रोशन कर रहा हो।
सेवा का एक लंबा सफर
इप्सोवा का यह मेला सिर्फ खरीदारी या मनोरंजन का अवसर नहीं है। यह उन हाथों को सहारा देने की कोशिश है, जो रोज़ी-रोटी की तलाश में संघर्ष कर रहे हैं। संस्था की अध्यक्ष शिखा गुप्ता बताती हैं… “हमारी कोशिश होती है कि हर साल इस मेले में झारखंड के ग्रामीण इलाकों की महिला समूहों को मंच मिले। वे यहां अपने हस्तशिल्प और घरेलू उत्पाद बेचती हैं, जिससे उनकी आमदनी बढ़ती है।”

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