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Simdega : झारखंड के सीमांत जिले सिमडेगा में पिछले दो महीनों से अपराधियों के खिलाफ जो रणनीतिक मुहिम चल रही है, उसने अब रंग दिखाना शुरू कर दिया है। “ऑपरेशन रेड हंट” नाम के इस विशेष अभियान ने न सिर्फ अपराधियों में खौफ पैदा किया है, बल्कि यह पुलिस के लिए भी एक मिसाल बन गया है। दो महीने में पुलिस ने 104 स्थायी (लाल) वारंटों का निष्पादन कर दिखाया… यानी हर दूसरे दिन एक से ज्यादा वारंटी कानून के शिकंजे में आए।
शुरुआत से बना मिशन… “रेड हंट”
ऑपरेशन रेड हंट की शुरुआत सिमडेगा पुलिस ने दो महीने पहले की थी। मकसद था… वर्षों से फरार वारंटियों को पकड़ना, जिनके नाम पर कोर्ट से स्थायी (लाल) वारंट जारी थे। पुलिस की फाइलों में ये नाम लाल स्याही से दर्ज थे, पर जमीन पर इन्हें पकड़ना आसान नहीं था। इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए सिमडेगा पुलिस ने “रेड हंट” को एक संगठित मिशन का रूप दिया। चरणबद्ध कार्रवाई की योजना बनी, और हर थाने को उसका लक्ष्य दिया गया।
11 चरणों में चला अभियान
अब तक इस अभियान के 11 चरण पूरे हो चुके हैं। हर चरण में पुलिस की अलग-अलग टीमों ने सटीक छापेमारी की।
पहले चरण में – 10 गिरफ्तारी, 12 वारंट निष्पादित
दूसरे चरण में – 4 गिरफ्तारी, 5 वारंट
तीसरे चरण में – 9 गिरफ्तारी, 9 वारंट
चौथे चरण में – 5 गिरफ्तारी, 5 वारंट
पांचवें चरण में – 1 गिरफ्तारी, 1 वारंट
छठे चरण में – 1 गिरफ्तारी, 1 वारंट
सातवें चरण में – 7 गिरफ्तारी, 10 वारंट
आठवें चरण में – 1 गिरफ्तारी, 1 वारंट
नौवें चरण में – 5 गिरफ्तारी, 2 वारंट
दसवें चरण में – 2 गिरफ्तारी, 10 वारंट
ग्यारहवें चरण में – 6 गिरफ्तारी
कुल मिलाकर 51 वारंटियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 6 ने पुलिस के दबाव में स्वेच्छा से न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया।
मृत वारंटियों का सत्यापन
अभियान के दौरान जब पुलिस ने दस्तावेज़ी सत्यापन शुरू किया, तो यह भी सामने आया कि 19 लाल वारंटी अब जीवित नहीं हैं।
सिमडेगा, बांसजोर, बानो, कुरडेग, ओड़गा और जलडेगा जैसे इलाकों में ये वारंटी वर्षों पहले मर चुके थे, लेकिन रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुआ था। पुलिस ने उनके मृत्यु प्रमाण पत्र अदालत को सौंपकर वारंट निष्पादन पूरा किया।
कुछ वारंट लौटे, कुछ के पीछे जारी है तलाश
अभियान के दौरान चार लाल वारंट ऐसे मिले जिन्हें वापस करना पड़ा —
- एक आरोपी पहले से ही जेल में था,
- एक का स्थायी पता दूसरे जिले में मिला,
- एक को कोर्ट से पहले ही जमानत मिल चुकी थी।
इस पारदर्शी प्रक्रिया ने पुलिस की कार्यशैली को और भरोसेमंद बनाया है।
वारंट से वारंटी तक… खौफ का असर
ऑपरेशन रेड हंट का सबसे बड़ा असर यह है कि अपराधियों में अब कानून का भय स्पष्ट दिख रहा है। कई वारंटी, जो पहले वर्षों तक फरार थे, अब खुद थाने पहुंचकर सरेंडर कर रहे हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कई फरार अपराधियों के परिजन अब खुद पुलिस से संपर्क कर उनकी गिरफ्तारी की जानकारी दे रहे हैं।
पहले 309 वारंट थे लंबित, अब संख्या तेजी से घटी
अभियान से पहले सिमडेगा जिले में 309 लाल वारंट लंबित थे। दो महीने में 104 वारंटों के निष्पादन के बाद अब लंबित मामलों की संख्या घटकर 205 से भी कम रह गई है। यह न केवल पुलिस के सक्रिय रवैये को दर्शाता है बल्कि अपराध नियंत्रण की दिशा में एक ठोस कदम भी है।
सिमडेगा पुलिस का संदेश : अब छिपना नामुमकिन
सिमडेगा एसपी एस अर्शी के नेतृत्व में यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। एसपी का स्पष्ट संदेश है किअब कानून से भागना संभव नहीं, चाहे अपराधी जंगल में हो या किसी दूसरे जिले में। थाना स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है और अगला लक्ष्य है कि शेष सभी वारंटों का निष्पादन दिसंबर तक पूरा कर लिया जाए।
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