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Pakur (Jaydev Kumar) : कभी-कभी एक छोटी-सी पहल सैकड़ों जिंदगियों में उम्मीद जगा देती है। पाकुड़ जिले का “प्रोजेक्ट जागृति” अब सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक मानवीय आंदोलन बन चुका है। इस आंदोलन की अगुवाई खुद डीसी मनीष कुमार कर रहे हैं, जिन्होंने शुक्रवार को अपना 23वां रक्तदान करते हुए कहा, “रक्तदान महादान है, क्योंकि इससे किसी की जिंदगी लौटाई जा सकती है।”
इस बार भी नज़ारा कुछ अलग था। पुराने सदर अस्पताल के रक्त अधिकोष से लेकर लिट्टीपाड़ा, अमड़ापाड़ा और महेशपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक, हर जगह लोग कतारों में खड़े थे… कोई सरकारी कर्मचारी, कोई शिक्षक, तो कोई किसान। महिलाएं भी पीछे नहीं थी। सभी के चेहरे पर एक सुकून था… “आज किसी की जान हमसे बच सकती है।”
लहू की हर बूंद, किसी की सांस बन सकती है
शिविर में डीसी मनीष कुमार ने जब कुर्सी पर बैठकर रक्तदान किया, तो वहां मौजूद युवा स्वयंसेवकों में एक नई ऊर्जा दौड़ गई।
रक्तदान के बाद उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “हर इंसान के शरीर में उतना लहू होता है कि वो किसी और को जीवन दे सके। ज़रूरत बस एक निर्णय की होती है… ‘हां, मैं भी करूंगा रक्तदान।’” उनकी इस प्रेरणा का असर दिखा… आज जिले में 215 लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। यह केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि 215 संभावित जिंदगियों का प्रतीक था, जो अब सुरक्षित हैं।
प्रोजेक्ट ‘जागृति’ : मानवता का मासिक पर्व
पाकुड़ प्रशासन ने प्रोजेक्ट जागृति की शुरुआत इस सोच के साथ की थी कि किसी भी मरीज को रक्त की कमी से जिंदगी न गंवानी पड़े।
इसके तहत हर माह की 24 तारीख को पूरे जिले के सभी प्रखंडों में रक्तदान शिविर आयोजित किया जाता है। डीसी मनीष कुमार कहते हैं, “हमारा लक्ष्य है कि जिले की कुल जनसंख्या का कम से कम एक प्रतिशत रक्त यूनिट हमेशा ब्लड बैंक में उपलब्ध रहे। इससे आपात स्थिति में किसी को भटकना न पड़े।” अब तक तीन हजार से अधिक रक्तवीर इस मुहिम से जुड़ चुके हैं। यह सिलसिला लगातार बढ़ रहा है… क्योंकि अब यह सरकारी अभियान नहीं, बल्कि एक सामुदायिक जिम्मेदारी बन चुका है।
लहू से बुनी उम्मीद की कहानी : जब डीसी और जनता ने दिखाई इंसानियत की झलक
पाकुड़ के डीसी मनीष कुमार ने अपने 23वें रक्तदान के साथ ‘प्रोजेक्ट जागृति’ की मिसाल कायम की। जिले में हर माह 24 तारीख को होता है रक्तदान pic.twitter.com/n6Ikwkd85E— News Samvad (@newssamvaad) October 24, 2025
कंधे से कंधा मिलाकर आगे आए अधिकारी और नागरिक
उपायुक्त के साथ-साथ अनुमंडल पदाधिकारी साईमन मरांडी, भू-अर्जन पदाधिकारी अजय सिंह बड़ाईक, डीपीएम ई-पंचायत आनंद प्रकाश और पीएमयू सेल के कर्मचारी भी रक्तदान करते दिखे। शिविर में प्रखंड स्तरीय अधिकारी, शिक्षक, आंगनबाड़ी सेविका, पंचायत प्रतिनिधि और आम नागरिकों ने एक साथ मिलकर इस दिन को खास बना दिया। रक्तदान के बाद जब डीसी ने सभी रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया, तो उनके शब्दों में गर्व झलक रहा था… “आप सब वो लोग हैं जो खून से जिंदगी लिखते हैं।”
पाकुड़ की पहचान बन रहा है ‘जागृति’
आज पाकुड़ की चर्चा झारखंड भर में इस वजह से हो रही है कि यहां रक्तदान अब एक उत्सव बन चुका है। लोग इसे सिर्फ “दान” नहीं, बल्कि “जिम्मेदारी” मान रहे हैं। महेशपुर की एक युवती नूतन हेम्ब्रम ने रक्तदान के बाद कहा, “पहली बार मैंने रक्त दिया, थोड़ा डर था, पर अब लग रहा है कि मैंने किसी अनजान को नई जिंदगी दी है। यह एहसास ही काफी है।”
मानवता का उत्सव, प्रशासन की पहल
हर महीने की 24 तारीख को जब जिले के सभी केंद्रों में रक्तदान शिविर लगते हैं, तो प्रशासन और जनता एक साथ खड़ी दिखती है।
यह सिर्फ रक्तदान नहीं, बल्कि मानवता का उत्सव है… जहां “मैं” की जगह “हम” लेते हैं। डीसी मनीष कुमार ने मुस्कुराते हुए कहा, “यह अभियान तभी सफल होगा जब हर पाकुड़वासी सोचे… ‘मेरा खून किसी की जिंदगी बन सकता है।’”
रक्तदान शिविर में इकट्ठा किये गये 215 यूनिट ब्लड
आज जिले में आयोजित रक्तदान शिविर में कुल 215 यूनिट लहू इकट्ठा किया गया। विभिन्न स्थानों पर हुए शिविरों से प्राप्त आंकड़े इस प्रकार हैं –
ब्लड बैंक, पाकुड़ – 69 यूनिट
टाउन हॉल, पाकुड़ – 15 यूनिट
महेशपुर – 50 यूनिट
हिरणपुर – 18 यूनिट
अमड़ापाड़ा – 20 यूनिट
पकुरिया – 18 यूनिट
लिट्टीपाड़ा – 25 यूनिट
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