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Pakur (Jaydev Kumar) : सुबह की पहली किरण के साथ ही इस्कॉन पाकुड़ का श्री श्री राधा रास बिहारी मंदिर कुछ अलग ही दृश्य पेश कर रहा था। हवा में घुली अगरबत्ती की सुगंध, मंदिर प्रांगण में गूंजते “हरे कृष्णा हरे राम” के संकीर्तन और बजते घड़ियाल की मधुर ध्वनि ने माहौल को भक्ति से भर दिया था। यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि भक्ति, प्रेम और आस्था का एक जीवंत उत्सव था… गोपाष्टमी का पर्व।
राधा-कृष्ण की झांकी ने मोह लिया मन
राधा-कृष्ण की अलौकिक झांकी और अभिषेक दर्शन देखने के लिए श्रद्धालु सुबह से ही मंदिर पहुंचने लगे। रंग-बिरंगे फूलों से सजा मंदिर परिसर रोशनी से जगमगा रहा था। हर ओर भक्ति की लहरें थीं और लोगों के चेहरों पर एक अद्भुत शांति। एक श्रद्धालु ने भावुक होकर कहा, “राधा-कृष्ण की झलक मिलते ही लगता है जैसे जीवन का सारा बोझ हल्का हो गया।”
वैदिक मंत्रों के बीच गौमाता की पूजा
गोपाष्टमी का यह पर्व गौसेवा को समर्पित है। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न कराई। भक्तों ने सजे-धजे गायों को चारा खिलाया और आशीर्वाद लिया। मंदिर के पुजारी आचार्य गोविंद प्रभु ने कहा, “गाय सिर्फ एक पशु नहीं, वह हमारी माता है। उसकी सेवा करना ईश्वर की सेवा के समान है।”
भजन, प्रवचन और प्रसाद से गूंजा मंदिर परिसर
दिनभर इस्कॉन मंदिर में भक्ति के स्वर गूंजते रहे। श्रीमद्भगवद्गीता पर प्रवचन हुआ, जिसमें जीवन में प्रेम और त्याग के संदेश को सरल शब्दों में समझाया गया। भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया और देर शाम तक भजन-कीर्तन में डूबे रहे। मंदिर के हर कोने से आती तालियों की गूंज और मृदंग की थाप जैसे आत्मा को झकझोर रही थी।
“गोपाष्टमी प्रेम, सेवा और समर्पण का पर्व”
मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सत्यवाग प्रभु ने बताया कि गोपाष्टमी का पर्व हमें यह याद दिलाता है कि भक्ति का सार सेवा में है। “राधा-कृष्ण के चरणों में समर्पण ही जीवन का सच्चा सुख है,” उन्होंने कहा।
भक्तों के अनुसार, यह दिन केवल पूजा का नहीं, बल्कि जीवन में भक्ति, करुणा और गौसेवा जैसे मूल्यों को अपनाने का संदेश देता है।
अंत में…
शाम ढलते-ढलते जब दीपक की लौ टिमटिमाने लगी और मंदिर की घंटियां फिर गूंज उठीं, तो लगा जैसे पूरा पाकुड़ शहर राधा-कृष्ण की भक्ति में एक हो गया हो। गोपाष्टमी का यह दिन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव बन गया, जिसने हर भक्त के मन में प्रेम और शांति का दीप जला दिया।
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