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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ के शहरकोल पंचायत भवन में आज सुबह कुछ अलग हलचल थी। बरामदे में लगी कुर्सियों पर गांव की महिलाएँ अपनी बच्चियों का हाथ थामे बैठी थीं। बुजुर्ग सावधानी से अपनी फाइलें संभाल रहे थे और किसान अपनी उम्मीदों को लेकर पंक्तियों में खड़े थे। यह कोई साधारण दिन नहीं था। सेवा का अधिकार सप्ताह के तहत यहां लगा शिविर लोगों के लिए उम्मीद लेकर आया था।
“पहले दफ्तर तक जाने में दो दिन लग जाते थे…”
शहरकोल की करीब 62 साल की एक महिला पहली बार किसी शिविर में आई थीं। हाथ में पुराने दस्तावेज लिए बोलीं, “पहले तो प्रमाण पत्र बनवाने में दो दिन लग जाते थे। अब गांव में ही सब हो रहा है। हम लोगों के लिए यही बड़ी बात है।” उनकी बात जैसे आसपास बैठे कई लोगों की मन की आवाज बन गई।
डीसी और डीडीसी सीधे लोगों के बीच
मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत डीसी मनीष कुमार और डीडीसी महेश कुमार संथालिया ने दीप जलाकर की। इस दौरान अधिकारी मंच पर नहीं बैठे, बल्कि नीचे आकर लोगों से सीधा संवाद करते रहे। एक किसान से बात करते हुए डीडीसी ने कहा, “अब सरकार आपके दरवाजे पर है। आपको दफ्तर आने की जरूरत नहीं, हम खुद गांव तक पहुंचे हैं।”
किसानों की चिंता और एकमुश्त राशि का वादा
धान अधिप्राप्ति को लेकर किसानों में कई सवाल थे। 40 वर्षीय एक किसान ने बताया, “हर बार पैसा आने में दिक्कत होती थी। इस बार सुन रहे हैं कि पूरा पैसा एक साथ आएगा।” डीसी ने उन्हें समझाया कि सरकार की कोशिश है कि इस बार भुगतान सीधे खाते में जाए। किसान संतुष्ट होकर आगे बढ़ गए, जैसे उन्हें किसी ने भरोसे का हाथ थमा दिया हो।
स्वास्थ्य शिविर में राहत की सांस
चिकित्सा स्टॉल पर भीड़ सबसे ज्यादा थी। कई महिलाओं ने पहली बार बीपी और शुगर की जांच करवाई। करीब 23 साल की एक गर्भवती महिला ने कहा, “घर से अस्पताल जाने में समय लगता है। आज यहां जांच हो गई, मन भी हल्का हो गया।”
डॉक्टरों ने उन्हें आयरन की गोलियाँ दीं और जरूरी सलाह भी।
छात्रों की उम्मीदें, महिलाओं की योजनाएं
स्कूल से आई एक छात्रा को सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना के बारे में जानकारी मिली। वह कहती है, “अब समझ आया कि कॉलेज तक पढ़ाई में सरकार पैसे से मदद करती है।” वहीं कई महिलाओं ने मईया सम्मान योजना के लिए आवेदन दिया। उनमें आत्मविश्वास साफ झलक रहा था।
शिकायतें और समाधान ऑन दी स्पॉट
शिविर की खास बात यह रही कि कई शिकायतों का निपटारा वहीं किया गया। एक बुजुर्ग ने राशन कार्ड में नाम जोड़ने का आवेदन दिया। कुछ मिनट बाद उन्हें बताया गया कि उनका आवेदन स्वीकार हो गया है और स्थिति जल्द अपडेट होगी। उनकी आंखों में चमक आ गई। उन्होंने कहा, “पहले ऐसा कहां होता था कि बात सुनकर तुरंत काम भी हो जाए।”
28 नवंबर तक हर पंचायत तक पहुंचेगी यह मुहिम
अधिकारियों ने बताया कि पहला चरण 28 नवंबर तक चलेगा। इसके बाद 30 नवंबर से फिर शिविर लगेगा ताकि कोई भी लाभार्थी छूट न जाए। शिविर में 15 से अधिक सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध थीं। इनमें प्रमाण पत्र, स्वास्थ्य जांच, किसान पंजीकरण, छात्रवृत्ति आवेदन, राशन कार्ड अपडेट और अन्य सुविधाएं शामिल हैं।
उम्मीदों का दिन, भरोसे की शुरुआत
शिविर के अंत में जब अधिकारी स्टॉलों का निरीक्षण कर निकल रहे थे, तभी एक वृद्ध महिला ने हौले से कहा, “आज लगा कि सरकार हमारी भी सुनती है।”
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