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Garhwa (Nityanand Dubey) : रविवार की सुबह रंका में ठंडी हवा बह रही थी और गांव के रास्तों पर कुछ लोग खेत की ओर जा रहे थे। इसी सन्नाटे में दो युवा अपने भविष्य की ओर कदम बढ़ाते हुए दौड़ने निकले थे। राजू और अनिल। दोनों पड़ोसी, दोनों दोस्त और दोनों के सपने एक जैसे। सेना और पुलिस में भर्ती होकर अपने परिवारों को बेहतर जीवन देना। वे हर सुबह की तरह आज भी दौड़ पर थे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि मंजिल के सपने उस मोड़ तक पहुंचते हुए टूट जाएंगे, जहां से वे रोज लौटते थे।
मोड़ पर रूठी किस्मत
रंका थाना से कुछ ही दूरी पर एक तीखा मोड़ है। यह सड़क रोजाना कई गाड़ियों को गुजरते देखती है, लेकिन उस सुबह उसने एक ऐसा दृश्य देखा जिसकी चर्चा पूरे इलाके में दर्द के साथ हो रही है। गिट्टी लदा एक हाईवा तेज रफ्तार में मोड़ पर पहुंचा। कहा जा रहा है कि चालक ने संतुलन खो दिया। ट्रक झटके से युवकों की ओर झुका और देखते ही देखते उन्हें रौंदता हुआ पलट गया। गिट्टी का ढेर, ट्रक का शोर और दो जिंदगियों का अचानक खत्म हो जाना। सबकुछ चंद सेकंड में हो गया।
सपनों से भरे दो घरों में मातम
राजू 22 साल का था। अनिल 21 का। दोनों मेहनती और लक्ष्य पर टिके रहने वाले लड़के थे। गांव में हर कोई उन्हें जानता था क्योंकि वे सुबह अंधेरा रहते निकलते थे और शाम तक मेहनत जारी रखते थे। गांव के बड़ों की आंखें भर आईं। राजू के पिता सुरेंद्र राम और अनिल के पिता नंदू राम को यह यकीन नहीं हुआ कि सुबह घर से निकले उनके बेटे शाम तक वापस नहीं आएंगे। दोनों परिवारों में सिर्फ रोने की आवाज रह गई।
गुस्से में गांव, सड़क पर जुटा जनसैलाब
हादसे की खबर गांव से निकलकर पूरे इलाके में फैल गई। लोग दौड़ते हुए घटनास्थल पर पहुंचे। गिट्टी हटाने के लिए जेसीबी बुलानी पड़ी। जब शव बाहर निकाले गए तो भीड़ का धैर्य टूट गया। गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा। ग्रामीणों ने रंका रमकंडा मार्ग को जाम कर दिया। उनका कहना था कि तेज रफ्तार वाहनों की वजह से पहले भी कई हादसे हुए हैं और प्रशासन हमेशा बाद में पहुंचता है। इस बार वे बिना ठोस कार्रवाई के वापस जाने को तैयार नहीं थे।
अफसरों ने संभाली स्थिति
स्थिति तनावपूर्ण देख एसडीओ रुद्र प्रताप, एसडीपीओ रोहित रंजन सिंह, इंस्पेक्टर अभिजीत गौतम और थानेदार रवि कुमार केशरी मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से शांत रहने की अपील की और आश्वासन दिया कि दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी समझा रहे थे, लेकिन भीड़ बार-बार उसी मोड़ की ओर देख रही थी जहां दो सपने बिखर गए थे।
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