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Garhwa (Nityanand Dubey) : गढ़वा के चिनियां प्रखंड की डोल पंचायत इन दिनों चर्चाओं में है। वजह सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि उन लोगों की उम्मीदों का टूटना है जो सरकारी योजनाओं पर भरोसा करके अपने जीवन में थोड़ा सुधार लाना चाहते थे। अबुआ आवास योजना और मनरेगा मजदूरी जैसे कार्यक्रम ग्रामीणों के लिए राहत का जरिया होते हैं, लेकिन जब इन्हीं योजनाओं में अनियमितता सामने आती है, तो यह सिर्फ कागजी घोटाला नहीं रहता, बल्कि कई परिवारों की जरूरतों पर सीधा असर डालता है।
गांव में चर्चा : “हमारा हक किसी और ने ले लिया”
डोल पंचायत में जब फर्जी निकासी का मामला खुला, तो सबसे पहले यही आवाजें उठीं कि मेहनत की मजदूरी किसी और के नाम पर निकाल ली गई। गांव के कई लोगों के चेहरे पर यही निराशा नजर आई कि जिस योजना से उम्मीद थी, वहीं से धोखा मिल गया। मनरेगा मजदूरी समय पर मिले तो घर का खर्च चलता है, बच्चों की फीस निकलती है, और छोटी-मोटी जरूरतें पूरी होती हैं। लेकिन जब खाते में पैसा आता ही नहीं जबकि सिस्टम दिखाता है कि मजदूरी भुगतान हो चुका है, तो यह सिर्फ वित्तीय अनियमितता नहीं रहती, यह भरोसा टूटने की कहानी बन जाती है।
जांच से खुलासा : फर्जी कोड और बिना काम के भुगतान
जिला स्तर की जांच में सामने आया कि मनरेगा सॉफ्टवेयर में फर्जी वर्क कोड बनाए गए थे। कई मजदूरों के नाम पर मजदूरी दिखा दी गई जबकि उस काम का कोई अस्तित्व नहीं था। डोभा निर्माण का भुगतान भी बिना काम कराए कर दिया गया। यह सब उन कागजों में छिपा रहा जिन पर सिर्फ हस्ताक्षर थे, लेकिन जमीन पर हकीकत नहीं। यही वजह थी कि जब यह मामला खुला, तो डीसी दिनेश यादव ने इसे गंभीरता से लिया।
गांव की आवाज : “अगर पैसे नहीं मिलते, तो काम करने का क्या मतलब?”
गांव के कई मजदूरों ने बताया कि मनरेगा उनके लिए मुश्किल समय में सहारा है। उन्हें यह जानकर धक्का लगा कि उनके नाम से मजदूरी निकाली जा रही थी लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिलता था। कई महिलाओं ने कहा कि मनरेगा के पैसे से वे घर चलाती हैं, बर्तन खरीदती हैं, बच्चों की दवा ले आती हैं। ऐसे में जब उनकी कमाई किसी कागजी प्रक्रिया में गायब हो जाए, तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी पर असर डालने वाला घाव बन जाता है।
मुखिया से रोजगार सेवक तक के खिलाफ डीसी ने की कार्रवाई
मुखिया पुष्पा देवी पर आरोप है कि उन्होंने अबुआ आवास योजना के लाभुक न होने के बावजूद मनरेगा सिस्टम में गलत तरीके से वर्क कोड बनवाया और मजदूरी की राशि निकलवाई। इस आरोप की जांच के बाद उनके निलंबन की अनुशंसा पंचायती राज निदेशक, रांची को भेज दी गई है।
पंचायत सचिव अरुप कुमार मंडल को काम में लापरवाही और अनियमितता का दोषी पाए जाने पर झारखंड सरकारी सेवक नियमावली 2016 के नियम 9(1) के तहत तुरंत निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय डंडई प्रखंड कार्यालय तय किया गया है।
मनरेगा के प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी रोशन कुमार को भी मामले में दोषी पाए जाने पर पद से मुक्त कर दिया गया है।
इसी तरह, तत्कालीन ग्राम रोजगार सेवक अनूप सिंह, वर्तमान रोजगार सेवक श्रवण करकेट्टा और कंप्यूटर सहायक अनूप कुमार को भी फर्जी निकासी में भूमिका मिलने पर तुरंत कार्यमुक्त कर दिया गया है।
डीसी ने दिया संदेश : “जनता का पैसा जनता को ही मिलेगा”
जांच रिपोर्ट आने के बाद उडीसी दिनेश यादव ने तत्काल कार्रवाई की। बीडीओ को भी स्पष्ट चेतावनी दी गई कि पर्यवेक्षण में चूक अब बर्दाश्त नहीं होगी। साथ ही यह भी कहा कि अवैध रूप से निकाली गई राशि की पूरी वसूली की जाए, ताकि सरकारी खजाने से गया पैसा वापस आए और जनता का भरोसा बना रहे।
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