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Koderma (Aftab Alam) : गिरिडीह के बदडीहा गांव में बीते साल जब सुजीत सिंह की शादी हुई थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि सिर्फ नौ महीने बाद ही वही घर मातम में डूब जाएगा। नई नवेली दुल्हन के हाथों की मेहंदी का रंग अभी पूरी तरह उतरा भी नहीं था कि सुजीत की तिरंगे में लिपटी देह की खबर ने पूरे परिवार का संसार उजाड़ दिया।
जिंदगी की नई शुरुआत, पर किस्मत ने मोड़ बदल दिया
कोडरमा जिले के मरकच्चो प्रखंड के देवीपुर गांव का बेटा सुजीत सिंह 27 वर्ष का था। शादी के बाद सुजीत और उनकी पत्नी अपने आने वाले जीवन को लेकर सपने बुन रहे थे। परिवार बताता है कि सुजीत कम ही बोलते थे, लेकिन मुस्कुराते बहुत थे। शादी के बाद उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई थी, जिसे वह खुशी-खुशी निभा रहे थे।
छठ पर आया था घर, पत्नी को दिलासा देकर लौटा था ड्यूटी
कुछ हफ्ते पहले सुजीत छठ पर घर आया था। पत्नी ने उससे लंबे दिनों तक साथ रहने की बात कही थी, लेकिन सुजीत मुस्कुराकर बोला था, “ड्यूटी है, जल्दी मिलूंगा।” किसे पता था कि वह आखिरी मुलाकात होगी। ड्यूटी पर लौटने के कुछ ही दिनों बाद बुधवार देर रात जम्मू कश्मीर से खबर आई कि सुजीत ने खुद को गोली मार ली। सूचना मिलते ही पत्नी बेहोश हो गई। घर में चीखें गूंज उठीं।
दोनों भाई सीआरपीएफ में, परिवार की उम्मीदें टूटीं
सुजीत के बड़े भाई भी सीआरपीएफ में हैं। पिता सिकंदर प्रसाद सिंह किसान हैं और मां इलमा देवी गृहिणी। परिवार को अपने दोनों बेटों पर गर्व था, लेकिन अब वही परिवार सदमे में है। गांव में जिस घर में कुछ महीने पहले शादी की खुशियां मनाई गई थीं, वहां आज हर कोई सुजीत को याद कर रो रहा है।
गांव में मातम, सभी के चेहरे पर एक ही सवाल… क्यों?
गुरुवार सुबह जैसे ही खबर फैली, पूरा देवीपुर गांव गम में डूब गया। लोग अब भी समझ नहीं पा रहे कि शांत स्वभाव वाले सुजीत ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया। सीआरपीएफ और प्रशासन अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटे हैं। आधिकारिक तौर पर कारणों की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
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