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Chatra : रात गहराते ही जब ठंड की सिहरन हड्डियों तक उतर जाती है, तब चतरा जिले के कई गांवों में नींद आंखों से कोसों दूर चली जाती है। बाहर घना कोहरा पसरा होता है, सन्नाटा चारों ओर फैल जाता है और उसी सन्नाटे के बीच एक डर हर दिल में धड़कने लगता है। यह डर है जंगली हाथियों का। दिन भर ठंड से जूझने के बाद लोग जैसे तैसे शाम काट लेते हैं, लेकिन जैसे ही अंधेरा होता है, गांवों में बेचैनी बढ़ जाती है। पथलगड़ा और सिमरिया थाना क्षेत्र के आसपास बसे गांवों में जंगली हाथियों का दल लगातार घूम रहा है। ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ खबर नहीं, बल्कि हर रात का सच बन चुका है।
नींद नहीं, सिर्फ खौफ का इंतजार
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि अब रात सोने के लिए नहीं, बल्कि इंतजार करने के लिए होती है। इंतजार इस बात का कि कहीं हाथियों की आहट सुनाई न दे। कई परिवार पूरी रात जागकर बिताते हैं। कोई दरवाजे पर बैठा रहता है, तो कोई छत पर चढ़कर आसपास नजर रखता है। एक ग्रामीण महिला कहती है कि बच्चे डर के मारे बार-बार मां से लिपट जाते हैं। ठंड से कांपते शरीर को संभालना मुश्किल होता है, ऊपर से यह डर कि अगर हाथी आ गए तो बच्चों को लेकर भागना भी आसान नहीं होगा।
ठंड से बचाव भी बन गया जोखिम
कड़ाके की ठंड में अलाव जलाना राहत देता है, लेकिन अब यही राहत जोखिम बन गई है। बाहर निकलने की हिम्मत कोई नहीं कर पा रहा। हाथियों के डर से लोग अपने आंगन तक सीमित हो गए हैं। ठंड में सिकुड़ते शरीर और डर से भरे मन के बीच जिंदगी जैसे थम सी गई है।
उजड़ते घर, टूटता हौसला
कुछ गांवों में हाथियों द्वारा घरों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं पहले ही हो चुकी हैं। टूटी दीवारें और बिखरा सामान सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि लोगों के हौसले पर भी चोट हैं। जिन घरों को सालों की मेहनत से खड़ा किया गया, वे एक ही रात में असुरक्षित हो गए। ग्रामीणों के चेहरे पर सवाल साफ दिखता है। ठंड बाहर जाने नहीं देती और हाथी घर में रहने नहीं देते। ऐसे में आखिर जाएं तो जाएं कहां।
उम्मीद अब भी बाकी है
इन हालातों के बीच ग्रामीणों की नजरें प्रशासन और वन विभाग की ओर टिकी हैं। लोग चाहते हैं कि हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर भेजा जाए और ठंड से राहत के लिए भी ठोस इंतजाम किए जाएं। चतरा के ये गांव आज सिर्फ ठंड और जंगली हाथियों से नहीं जूझ रहे, बल्कि उस असुरक्षा से लड़ रहे हैं जो हर रात उनके दरवाजे पर दस्तक देती है। ठंड और डर के इस दोहरे साये में भी ग्रामीण उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद आने वाली रात कुछ सुकून लेकर आए।
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