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Bhojpur : जिस घर में रिटायरमेंट के बाद सुकून भरी जिंदगी के सपने सज रहे थे, उसी आंगन में एक पिता की सांसें थम गईं। झारखंड पुलिस के हवलदार पशुपतिनाथ तिवारी छुट्टी पर अपने गांव भगवतपुर आए थे। गिनती के महीनों बाद वर्दी उतरनी थी और परिवार के साथ शांत जीवन शुरू होना था। लेकिन 19 दिसंबर की उस रात उनका सपना हमेशा के लिए टूट गया।
छुट्टी नहीं, आखिरी सफर बन गई घर वापसी
हजारीबाग के पीसीआर शाखा में चालक हवलदार के पद पर तैनात पशुपतिनाथ तिवारी 31 जनवरी 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले थे। पत्नी मणी देवी और बच्चों के साथ भविष्य की योजनाएं चल रही थीं। गांव लौटने पर किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी छुट्टी होगी।
जिस बेटे से उम्मीद थी, वही बना हत्यारा
पुलिस जांच में सामने आया सच रिश्तों को झकझोर देने वाला है। हत्या किसी बाहरी ने नहीं, बल्कि अपने ही बेटे विशाल तिवारी ने की। साथ था उसका दोस्त मो. जिशान अहमद जिलानी। अनुकंपा नौकरी, पैसे और संपत्ति की चाह ने बेटे को इस हद तक अंधा कर दिया कि उसने पिता को ही रास्ते से हटा दिया।
सोते पिता पर चाकू का वार
पुलिस के अनुसार 19 दिसंबर की रात दोनों आरोपी बाइक से हजारीबाग से भगवतपुर पहुंचे। पेड़ के सहारे घर में घुसे और बरामदे में पलंग पर सो रहे पशुपतिनाथ तिवारी की चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी। नींद में डूबे पिता को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
वारदात के बाद सामान्य दिखने की कोशिश
हत्या के बाद दोनों आरोपी बाइक से वापस हजारीबाग निकल गए। भागने के दौरान सहार पुल के पास सोन नदी में चाकू और ग्लव्स फेंक दिए गए। शक से बचने के लिए विशाल तिवारी पत्नी के साथ चौपारण टोल प्लाजा के रास्ते गांव लौटा, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
मां की शिकायत, पुलिस की मेहनत
मृतक की पत्नी मणी देवी के बयान पर चांदी थाना में मामला दर्ज हुआ। भोजपुर एसपी के निर्देश पर तकनीकी अनुसंधान और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच की गई। मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल ने पुलिस को हजारीबाग तक पहुंचाया। पहले दोस्त जिशान पकड़ा गया, फिर सख्ती से पूछताछ में पूरा सच सामने आया। इसके बाद बेटे विशाल को गिरफ्तार किया गया।
नशा, लालच और टूटा रिश्ता
जांच में यह भी सामने आया कि विशाल नशे का आदी था और पिता-पुत्र के संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण थे। हाल ही में पशुपतिनाथ तिवारी ने दो बीघा जमीन का एग्रीमेंट कराया था, जिसकी जानकारी बेटे को नहीं थी। विशाल को डर था कि पिता संपत्ति बेटी प्रियंका तिवारी के नाम कर सकते हैं। इसी आशंका ने उसकी सोच को और हिंसक बना दिया।
दो साल से बन रही थी मौत की प्लानिंग
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गुस्सा अचानक नहीं फूटा। करीब दो साल पहले भी बाइक दुर्घटना कराकर पिता की हत्या की साजिश रची गई थी, लेकिन योजना नाकाम रही। रिटायरमेंट की तारीख नजदीक आने पर पिछले कुछ महीनों से दोबारा हत्या की तैयारी चल रही थी। पुलिस के मुताबिक पिता के बाद बहन को भी रास्ते से हटाने की योजना थी।
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