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Hazaribagh (Barkagaon) : मंगलवार का दिन स्थानीय फुटबॉल मैदान के लिए किसी उत्सव से कम नहीं था। निजी कोल कंपनी की जनसुनवाई के लिए लोग आए, उम्मीद थी कि विकास के लिए अपनी बात रख सकेंगे, लेकिन यह सभा अचानक डर और अफरातफरी में बदल गई।
खौफ का साया और अचानक हमला
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रैक्टरों पर सवार एक समूह कार्यक्रम स्थल पर पहुंचा, उनके हाथों में भाला, तीर और हसुआ थे। चेहरे मास्क, मफलर और हेलमेट से ढके हुए थे। उन्होंने पंडाल में घुसते ही वहां मौजूद ग्रामीणों और रैयतों पर बेरहमी से वार करना शुरु कर दिया। कुछ महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया। लोगों की चीख-चित्कार से मैदान दहल उठा। घटना के एक गवाह बताते हैं, “हम बस अपनी बातें रखना चाहते थे, पर अचानक लोगों ने हमला कर दिया।” उनका चेहरा अब भी घटना की याद से भयभीत है।
तोड़-फोड़ और लाखों का नुकसान
पंडाल में कुर्सियां टूट गईं, आयोजनों की व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गईं। स्थानीय प्रशासन ने नुकसान का अनुमान लाखों रुपये लगाया है। एक आयोजक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “सब कुछ मिनटों में तबाह हो गया। हमारी तैयारी और मेहनत बर्बाद हो गई।”
बाबूलाल मरांडी ने कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
इस घटना का फैली खबर के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी नेसरकार पर बड़ा हला बोला है। उन्होंने इस घटना की सोशल मीडिया पर निंदा की और राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं सरकार की कार्यशैली और प्रशासनिक नियंत्रण पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय विधायक रौशन लाल चौधरी और पूर्व विधायक अंबा प्रसाद भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत कर हालात का जायजा लिया।
हेमंत सोरेन झारखंड नहीं संभाल पा रहे हैं और विदेश गए हैं पूंजीपतियों को रिझाने… जनता के पैसों से विदेश की सैर कर भले लीजिए, लेकिन झारखंड में व्याप्त जंगलराज अब सतह पर आ चुका है।
हजारीबाग के बड़कागांव प्रखंड में गोंदुलपारा खनन परियोजना के लिए आज प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की… pic.twitter.com/wKCu7fn8SV
— Babulal Marandi (@yourBabulal) January 20, 2026
इलाके में अवैध गतिविधियों का लंबे समय का असर
स्थानीय लोग बताते हैं कि यह इलाका लंबे समय से अवैध कोयला कारोबार और बालू तस्करी का अड्डा रहा है। विकास परियोजनाओं का विरोध करने वाले कुछ दागी किस्म के लोग बार-बार हिंसक घटनाओं को अंजाम देते रहे हैं। इससे इलाके की शांति और कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। एक ग्रामीण ने आंखें नम करते हुए कहा, “हम सिर्फ अपना हक मांग रहे थे, पर विकास विरोधियों ने हमारे लिए डर का माहौल बना दिया।”
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