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Home » धूल, दबाव और दर्द… हादसे के बाद सवालों के घेरे में NTPC-PVUNL की सुरक्षा व्यवस्था
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धूल, दबाव और दर्द… हादसे के बाद सवालों के घेरे में NTPC-PVUNL की सुरक्षा व्यवस्था

January 31, 2026No Comments4 Mins Read
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NTPC-PVUNL
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Ranchi/Ramgarh (Rudra/Dharmendra) : शनिवार की सुबह पतरातू के निर्माणाधीन सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट में आम दिनों जैसी ही थी। हेलमेट पहने मजदूर, ऊंचे स्ट्रक्चर, मशीनों की आवाज और समय पर काम पूरा करने का दबाव। लेकिन कुछ ही पलों में यह सामान्य सुबह 12 परिवारों के लिए डर, दर्द और अनिश्चितता में बदल गई। यूनिट-2 के एयर कूल्ड कंडेंसर सेक्शन में काम चल रहा था। ACC डक्ट के भीतर इरेक्शन और टेस्टिंग का काम। अचानक एक तेज आवाज, फिर धूल का घना गुबार। इन प्लेट सील टूट चुकी थी। प्रेशराइज्ड डस्ट बाहर निकला और सामने खड़े मजदूरों को अपनी चपेट में ले लिया। किसी को कुछ समझने का मौका तक नहीं मिला।

मजदूर बोले, कुछ सेकंड में सब बदल गया

घायल मजदूरों में शामिल एक श्रमिक ने अस्पताल के बेड पर लेटे हुए बताया कि उन्हें लगा जैसे अचानक सांस रुक गई हो। आंखों के सामने कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। शरीर पर धूल और तेज झटके का असर साफ महसूस हो रहा था। साथ काम कर रहे कई मजदूर गिर पड़े। किसी के हाथ में चोट लगी, किसी की पीठ में। किसी को सांस लेने में तकलीफ होने लगी। ये मजदूर कोई मशीन नहीं, बल्कि रोजी-रोटी के लिए जान जोखिम में डालने वाले लोग हैं। इनमें से अधिकतर बाहर के जिलों से आए हैं। ठेकेदार के भरोसे, बड़े नाम वाली परियोजना की सुरक्षा पर विश्वास कर यहां काम कर रहे थे।

बड़े प्रोजेक्ट, छोटी सुरक्षा

यह परियोजना NTPC-PVUNL की संयुक्त है, जिसे राज्य और देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए अहम बताया जाता है। करोड़ों की लागत, आधुनिक तकनीक और बड़े दावे। लेकिन सवाल वही पुराना है। क्या ऐसे प्रोजेक्ट में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा उतनी ही अहम मानी जाती है। हादसे के वक्त ACC का काम BHEL और उससे जुड़ी ठेका कंपनी द्वारा किया जा रहा था। 12 में से 9 मजदूर आरपीपी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े थे, जबकि 3 BHEL के कर्मचारी थे। हादसे के बाद सभी को पीटीपीएस अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने कहा कि चोटें हल्की हैं, सभी खतरे से बाहर हैं। लेकिन क्या सिर्फ खतरे से बाहर होना ही काफी है।

रामगढ़ के पतरातू स्थित पीवीयूएनएल में निर्माणाधीन एसीसी टू में डक्ट इन प्लेट सील टूटने से 11 मजदूर घायल हो गए। सभी का इलाज पीटीपीएस अस्पताल में जारी है। प्रबंधन ने जांच टीम बनाई है।#ntpc #patratu #newssamvad pic.twitter.com/iFrS1p61vd

— News Samvad (@newssamvaad) January 31, 2026

इलाज तो मिला, भरोसा कहां है

NTPC-PVUNL प्रबंधन की ओर से बयान आया कि स्थिति नियंत्रण में है, जांच टीम बना दी गई है और सुरक्षा मानकों की समीक्षा होगी। ऐसे बयान हर हादसे के बाद आते हैं। मजदूरों के लिए सवाल यह है कि अगली शिफ्ट में काम पर लौटते वक्त क्या उनका डर कम होगा। एक मजदूर के साथी ने हौले से बताया कि हादसे के बाद साइट पर काम कुछ देर के लिए रुका, फिर धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिश हुई। किसी ने यह नहीं बताया कि गलती किसकी थी या आगे क्या बदलेगा।

जांच के वादे और पुरानी यादें

पतरातू या देश के दूसरे बड़े पावर प्रोजेक्ट्स में यह पहला हादसा नहीं है। हर बार तकनीकी खराबी, मानवीय भूल या अप्रत्याशित घटना कहकर फाइलें बंद कर दी जाती हैं। जांच रिपोर्ट आती है, लेकिन जमीन पर बदलाव कम ही दिखता है। प्रबंधन ने कहा है कि दोषियों पर कार्रवाई होगी। लेकिन मजदूर पूछते हैं कि अगर सुरक्षा मानक सही होते, निगरानी कड़ी होती और काम के दबाव से ज्यादा इंसानी जान की कीमत समझी जाती, तो शायद यह हादसा होता ही नहीं।

नेताओं की मौजूदगी, मजदूरों की उम्मीद

हादसे के बाद बड़कागांव विधायक सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायलों से बात की, हालचाल पूछा। यह मुलाकात मजदूरों के लिए एक उम्मीद की तरह थी कि शायद उनकी आवाज ऊपर तक पहुंचे। लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है। जब धूल बैठ जाएगी, खबरें बदल जाएंगी, तब क्या NTPC-PVUNL और उससे जुड़ी एजेंसियां सच में सुरक्षा को प्राथमिकता देंगी। या फिर अगला हादसा किसी और यूनिट, किसी और मजदूर के साथ होगा।

इसे भी पढ़ें : पीवीयूएनएल में बड़ा हादसा, डक्ट सील टूटने से 11 मजदूर जख्मी… देखें वीडियो

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