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News Samvad : अमेरिका और भारत के बीच करीब एक साल तक चली बातचीत के बाद आखिरकार एक व्यापार समझौते पर सहमति बन गई है। हालांकि इस समझौते की पूरी शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं, लेकिन यह साफ हो चुका है कि भारत पर लगाया गया कुल 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ अब घटकर 18 फीसदी रह गया है।
इसमें से 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क, जो भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया गया था, उसे पूरी तरह हटा दिया गया है। वहीं व्यापार घाटा कम करने के नाम पर लगाया गया 25 फीसदी आयात शुल्क अब घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है।
इस फैसले से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद होंगे सस्ते
अब तक अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर कई मामलों में 50 फीसदी तक आयात शुल्क देना पड़ रहा था। अब वही शुल्क घटकर 18 फीसदी रह जाएगा।
इसका सीधा असर यह होगा कि अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान की कीमत कम होगी। इससे वहां भारतीय उत्पादों की मांग फिर से बढ़ सकती है, जो पिछले कुछ समय में महंगे होने की वजह से घट गई थी।
लंबे समय में भारत को अपने दूसरे प्रतिद्वंद्वी देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति मिलने की संभावना है।
रूस से तेल खरीदने पर लगाया गया 25 फीसदी टैरिफ पूरी तरह हटा
अमेरिका ने 27 अगस्त से भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाया था। इस वजह से कई उत्पादों की लागत काफी बढ़ गई थी।
अब यह अतिरिक्त टैरिफ पूरी तरह हटा दिया गया है। साथ ही व्यापार घाटे को लेकर लगाया गया शुल्क भी कम कर दिया गया है। इससे भारतीय निर्यातकों पर लागत का दबाव घटेगा।
टेक्सटाइल सेक्टर को सबसे ज्यादा राहत की उम्मीद
भारत के कपड़ा उद्योग के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार रहा है। टैरिफ लागू होने से पहले भारत के कुल टेक्सटाइल निर्यात का करीब 28 फीसदी हिस्सा अमेरिका को जाता था, जिसकी कीमत 10.3 अरब डॉलर से ज्यादा थी।
जब अमेरिका ने टैरिफ बढ़ाकर 50 फीसदी किया, तो भारतीय कपड़ों की कीमत वहां काफी महंगी हो गई। इसका फायदा वियतनाम, इंडोनेशिया और बांग्लादेश जैसे देशों को मिला, जहां टैरिफ दरें भारत से कम थीं।
इस वजह से भारतीय कपड़ा उद्योग को अपने उत्पाद सस्ते दामों पर भेजने पड़े ताकि अमेरिकी बाजार बचाया जा सके। कई मामलों में निर्यातकों को अपनी मार्जिन घटानी पड़ी।
अब टैरिफ 18 फीसदी होने से भारतीय कपड़ा उद्योग को फिर से प्रतिस्पर्धा में मजबूत होने का मौका मिलेगा।
रत्न और आभूषण उद्योग को भी बड़ा फायदा
भारत हर साल अमेरिका को करीब 12 अरब डॉलर के रत्न और आभूषण निर्यात करता है।
पहले पॉलिश्ड हीरों पर अमेरिका में कोई शुल्क नहीं लगता था, जबकि सोने और प्लैटिनम की ज्वैलरी पर 5 से 7 फीसदी और चांदी की ज्वैलरी पर 5 से 13.5 फीसदी तक शुल्क था।
लेकिन जब कुल टैरिफ 50 फीसदी तक पहुंच गया, तो इस सेक्टर को भारी नुकसान हुआ। गुजरात के सूरत जैसे शहरों में, जो डायमंड इंडस्ट्री का बड़ा केंद्र है, वहां कामकाज और रोजगार पर भी असर देखने को मिला।
अब टैरिफ घटने से इस उद्योग में फिर से मांग बढ़ने की उम्मीद है।
कृषि और मरीन उत्पादों को राहत
भारत अमेरिका को हर साल 5.6 अरब डॉलर से ज्यादा के कृषि उत्पाद निर्यात करता है। इसमें मरीन उत्पाद, मसाले, डेयरी उत्पाद, चावल, आयुष और हर्बल उत्पाद, खाद्य तेल, चीनी, ताजा फल और सब्जियां शामिल हैं।
ट्रंप के टैरिफ का सबसे ज्यादा असर भारत की सीफूड और मरीन इंडस्ट्री पर पड़ा था।
अब शुल्क 18 फीसदी होने से इस सेक्टर को भी दोबारा गति मिलने की उम्मीद है।
चमड़ा, फुटवियर, केमिकल और मशीनरी सेक्टर पर भी असर
इनके अलावा भारत अमेरिका को हर साल
चमड़ा और फुटवियर से करीब 1.18 अरब डॉलर
केमिकल उत्पादों से 2.34 अरब डॉलर
इलेक्ट्रिक और मशीनरी उत्पादों से करीब 9 अरब डॉलर का निर्यात करता है
इन सभी सेक्टरों को टैरिफ में कटौती से सीधा फायदा मिलने की संभावना है।
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पहले से ही सुरक्षित रहा
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर अमेरिका को निर्यात करने वाले सबसे बड़े सेक्टरों में शामिल है। भारत से अमेरिका को स्मार्टफोन, लैपटॉप, सर्वर और टैबलेट्स का निर्यात तेजी से बढ़ा है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस सेक्टर पर आयात शुल्क लगाने के लिए अमेरिका को अपने कानून के तहत अलग से समीक्षा करनी होती। इसलिए यह सेक्टर ट्रंप के टैरिफ के दायरे से काफी हद तक बाहर रहा।
यानी इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पहले से ही अपेक्षाकृत सुरक्षित था।
फार्मा सेक्टर को भी टैरिफ से छूट मिली रही
भारत के दवा उद्योग के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है। अमेरिका को भारत से करीब 10.5 अरब डॉलर का फार्मा निर्यात होता है, जो भारत के कुल फार्मा निर्यात का लगभग 40 फीसदी है।
इस सेक्टर को भी ट्रंप के टैरिफ के दायरे से बाहर रखा गया था। इसलिए फार्मा उद्योग पर इस फैसले का असर सीमित रहेगा।
कुल मिलाकर भारत को क्या फायदा होगा
टैरिफ 50 फीसदी से घटकर 18 फीसदी होने से
भारतीय उत्पाद अमेरिका में सस्ते होंगे
निर्यातकों की लागत घटेगी
टेक्सटाइल, ज्वैलरी, कृषि और मरीन जैसे सेक्टरों को सीधी राहत मिलेगी
भारत को वियतनाम, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे देशों के मुकाबले फिर से मजबूत स्थिति मिल सकती है
हालांकि असली असर तब साफ होगा, जब अमेरिका और भारत के बीच हुए समझौते की पूरी शर्तें सार्वजनिक की जाएंगी।
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