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Home » सेवा से सजी सालगिरह : अदाणी की खुशी बनी सैकड़ों जिंदगियों की ताकत
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सेवा से सजी सालगिरह : अदाणी की खुशी बनी सैकड़ों जिंदगियों की ताकत

February 5, 2026No Comments6 Mins Read
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Ahmedabad : अहमदाबाद की ठंडी और शांत शाम में शांतिग्राम स्थित बेल्वेडियर क्लब का हरा-भरा लॉन रोशनी से जगमगा रहा था। वातावरण में एक अलग ही सुकून, अपनापन और भावनात्मक गर्माहट थी। यह कोई भव्य पार्टी नहीं थी, न ही दिखावे से भरा आयोजन। यह शाम समर्पित थी उन महिलाओं के नाम, जिनके जीवन में संघर्ष तो बहुत रहा, लेकिन हौसले कभी कम नहीं हुए।

5 फरवरी 2026 की यह शाम दिवा और जीत अदाणी की शादी की पहली सालगिरह का प्रतीक थी। लेकिन यह सालगिरह केवल निजी खुशी तक सीमित नहीं थी। यह एक साल पहले लिए गए उस वचन की पुष्टि थी, जिसे उन्होंने अपने विवाह से पहले समाज के नाम समर्पित किया था।

एक संकल्प, जो समारोह से बड़ा बन गया

7 फरवरी 2025 को विवाह से पहले दिवा और जीत अदाणी ने तय किया था कि वे अपने जीवन के इस सबसे खास अवसर को केवल निजी खुशी तक सीमित नहीं रखेंगे। उन्होंने संकल्प लिया कि हर वर्ष वे 500 दिव्यांग महिलाओं को दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेंगे। इसी संकल्प ने जन्म लिया – ‘अदाणी मंगल सेवा’ का।

यह कोई एकमुश्त दान नहीं था। यह था सम्मान, आत्मनिर्भरता और स्थिर भविष्य का भरोसा। हर लाभार्थी महिला को 10 लाख रुपये की एफडी दी गई, जिससे उन्हें नियमित मासिक आय मिल सके और 10 साल बाद मूलधन भी प्राप्त हो। यह सहायता किसी क्षणिक राहत से कहीं आगे की सोच का परिणाम थी।

संघर्षों से उम्मीद तक की यात्रा

कार्यक्रम में मौजूद कई महिलाओं की आंखों में चमक थी। कुछ की आंखें देख नहीं पाती थीं, तो कुछ के पैर जीवन की दौड़ में साथ नहीं दे पाते। लेकिन उनके चेहरे पर आत्मविश्वास और संतोष साफ झलक रहा था। रीना देवी, जो पोलियो के कारण बचपन से चल नहीं पातीं, कहती हैं, “पहले लगता था कि मेरी जिंदगी दूसरों पर बोझ बनकर रह जाएगी। आज मुझे भरोसा है कि मैं अपने बच्चों का भविष्य खुद संवार सकती हूं।” इसी तरह, नेत्रहीन लाभार्थी सीमा कुमारी ने बताया, “यह एफडी सिर्फ पैसे नहीं है। यह हमें सम्मान के साथ जीने का अधिकार देती है।”

इन महिलाओं को ‘यूथ फॉर जॉब्स’ परियोजना के माध्यम से चुना गया, जिनके पास यूडीआईडी कार्ड था। चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और जरूरत आधारित रही।

सेवा का दर्शन : ‘सेवा ही साधना है’

अदाणी मंगल सेवा की जड़ें गौतम अदाणी के जीवन दर्शन से जुड़ी हैं – ‘सेवा ही साधना है।’ इसका अर्थ है कि सेवा केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि अनुशासन, निरंतरता और जिम्मेदारी के साथ की जानी चाहिए।यह दर्शन इस पहल को एक पारिवारिक भावना से आगे बढ़ाकर सामाजिक मिशन बना देता है। हर साल 50 करोड़ रुपये की राशि इस कार्यक्रम के लिए निर्धारित की गई है, ताकि यह पहल बिना रुके आगे बढ़ती रहे।

भावनाओं से भरी शाम

कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना और चिंतन से हुई। उसके बाद एक प्रस्तुति के माध्यम से मंगल सेवा की यात्रा को दिखाया गया। लॉन में बैठे लोग केवल दर्शक नहीं थे, वे इस बदलाव के साक्षी थे। सबसे भावुक पल तब आया, जब लाभार्थियों को एफडी प्रमाणपत्र सौंपे गए। जब एक मां ने कांपते हाथों से प्रमाणपत्र थामा और अपनी बेटी को सीने से लगा लिया, तो कई आंखें नम हो गईं। यह सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं था, यह सुरक्षा, आत्मसम्मान और भरोसे का प्रतीक था।

संस्कृति और संवेदना का संगम

अहमदाबाद के नेत्रहीन संघ द्वारा प्रस्तुत गरबा और फ्यूजन संगीत ने पूरे माहौल को जीवंत कर दिया। जब दृष्टिहीन कलाकार ताल पर थिरकते नजर आए, तो यह संदेश साफ था कि सीमाएं शरीर में नहीं, सोच में होती हैं। उनकी प्रस्तुति ने साबित कर दिया कि कला और आत्मविश्वास किसी बाधा के मोहताज नहीं होते।

पिता का गर्व, समाज का संदेश

गौतम अदाणी ने इस अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि जब किसी बेटी के चेहरे पर मुस्कान लौटती है, तो वह किसी भी उपलब्धि से बड़ा होता है। एक पिता के रूप में उन्होंने खुद को धन्य बताया कि उनके बच्चे अपनी खुशियों को समाज के साथ बांट रहे हैं। उनके शब्दों में सिर्फ गर्व नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और विनम्रता भी झलक रही थी।

मां की दृष्टि, समाज की दिशा

अदाणी फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. प्रीति अदाणी का संबोधन पूरे कार्यक्रम का भावनात्मक केंद्र था। उन्होंने कहा, “यह कार्यक्रम केवल आर्थिक सहायता नहीं है। यह गरिमा, सपनों और आत्मसम्मान का सम्मान है।” उन्होंने दिव्यांगता को कमजोरी नहीं, बल्कि साहस और लचीलेपन का प्रतीक बताया। उनकी बातों में मां की ममता, समाजसेवी की प्रतिबद्धता और नेतृत्व की स्पष्टता थी।

नई पीढ़ी का संकल्प

जीत अदाणी ने कहा कि मंगल सेवा उनके लिए कोई एक बार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जीवनभर निभाने वाला दायित्व है। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ा सहयोग वही होता है, जो खामोशी से, लगातार और सम्मान के साथ मिलता रहे।

दिवा अदाणी ने इसे “स्थायी सुरक्षा का विश्वास” बताया। उनके शब्दों में आत्मविश्वास और संवेदनशीलता दोनों झलक रही थीं।

कहानियों का संग्रह : कॉफी टेबल बुक

कार्यक्रम के दौरान ‘अदाणी मंगल सेवा’ की कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी हुआ। इस पुस्तक में उन महिलाओं की कहानियां संकलित हैं, जिन्होंने संघर्ष से सफलता तक का सफर तय किया। यह किताब केवल तस्वीरों का संग्रह नहीं, बल्कि उम्मीदों की डायरी है। हर पन्ना यह बताता है कि सही सहयोग मिलने पर कोई भी जीवन बदल सकता है।

सेवा की निरंतर यात्रा

मंगल सेवा सिर्फ अहमदाबाद तक सीमित नहीं है। प्रयागराज महाकुंभ से लेकर पुरी की रथ यात्रा तक, अदाणी समूह ने सेवा के कई उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। चाहे तीर्थयात्रियों की मदद हो या जरूरतमंदों की सेवा, मूल मंत्र एक ही है… मानवता।

सालगिरह से आगे की सोच

यह सालगिरह यह सिखाती है कि खुशियों का असली अर्थ बांटने में है। दिवा और जीत अदाणी ने यह साबित किया कि निजी जीवन की सफलता तभी सार्थक होती है, जब उसका असर समाज तक पहुंचे।उनकी यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक प्रेरणा है।

जब सेवा बन जाए जीवन का हिस्सा

अदाणी मंगल सेवा का पहला वर्ष पूरा होना केवल एक आंकड़ा नहीं है। यह 500 महिलाओं की बदली हुई जिंदगी का प्रमाण है। यह उन बच्चों की मुस्कान है, जिन्हें अब अपने भविष्य की चिंता कम है। यह उन माताओं का सुकून है, जिन्हें अब अपने कल की सुरक्षा का भरोसा है।

संवेदना से सशक्तिकरण तक

दिवा और जीत अदाणी की पहली सालगिरह एक व्यक्तिगत उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक बन गई। यह कहानी है उस सोच की, जिसमें सेवा दिखावा नहीं, जीवनशैली होती है। यह कहानी है उस भरोसे की, जिसमें मदद दया नहीं, अधिकार बन जाती है। और यह कहानी है उन 500 महिलाओं की, जिन्होंने एक संकल्प के सहारे अपने भविष्य को रोशन करना शुरू किया।

Also Read : अदाणी का लाइट इंडिया प्रोजेक्ट : रोशनी का मिशन, रोजगार की गारंटी

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