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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी ने पतरातु की 222.29 एकड़ जमीन जियाडा (JIADA) को सौंपे जाने के फैसले पर सरकार को सीधे-सीधे घेरा। शून्यकाल में बोलते हुए उन्होंने साफ कहा कि विकास के नाम पर लोगों को उजाड़ना ठीक नहीं है। जब तक पुख्ता पुनर्वास की व्यवस्था नहीं होती, तब तक जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया रोक दी जाए।
हजारों परिवारों पर मंडरा रहा खतरा
विधायक ने सदन को बताया कि हेसला, जनता नगर, उचरिंग और कटिया पंचायत के करीब 2000 परिवार इस फैसले से प्रभावित होंगे। इसके अलावा लगभग 400 छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी पर भी संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ये लोग कोई आज के बसे हुए नहीं हैं। वर्षों से यहां रह रहे हैं, अपने घर बना चुके हैं, बच्चों की पढ़ाई चल रही है, रोजमर्रा की जिंदगी यहीं से जुड़ी है। ऐसे में अचानक जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू करना लोगों के भविष्य से खिलवाड़ है।
“इलाका पूरी तरह आबाद है”
रोशन लाल चौधरी ने यह भी याद दिलाया कि जिस जमीन की बात हो रही है, वहां पंचायत भवन, स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र जैसी सरकारी सुविधाएं पहले से मौजूद हैं। उनका कहना था कि जब सरकार ने खुद यहां बुनियादी ढांचा खड़ा किया है, तो यह साफ है कि इलाका पूरी तरह आबाद है। ऐसे में लोगों को हटाने से पहले उनकी पूरी व्यवस्था करना सरकार की जिम्मेदारी है।
विकास हो, लेकिन इंसाफ के साथ
विधायक ने सदन में साफ शब्दों में कहा, “विकास के नाम पर वर्षों से बसे लोगों के आशियाने नहीं उजाड़े जाने चाहिए।” उन्होंने मांग रखी कि जब तक प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास और रोजगार की ठोस व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक जमीन हस्तांतरण पर रोक लगाई जाए। उनका कहना था कि सरकार को उद्योग और विकास जरूर करना चाहिए, लेकिन उसमें आम लोगों का हक और सम्मान भी सुरक्षित रहना चाहिए।
सरकार के रुख पर सबकी नजर
अब इस मुद्दे पर सरकार क्या जवाब देती है और क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर इलाके के हजारों परिवारों की नजर टिकी है। फिलहाल इतना तय है कि पतरातु के विस्थापित परिवारों की आवाज विधानसभा तक पहुंच चुकी है और उनके हक की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है।
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