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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : सुबह के करीब साढ़े सात बजे का वक्त। हल्की फुहार पड़ चुकी थी। भदानीनगर की तरफ से एक दंपति बाइक पर धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था। सामने कीचड़ से भरा डायवर्जन। जैसे ही बाइक मिट्टी वाले हिस्से में पहुंची, पहिया फिसला और दोनों सड़क किनारे बने नाले में जा गिरे। आसपास के लोग दौड़े, उन्हें बाहर निकाला। चोट ज्यादा नहीं है, लेकिन डर गहरा है। यह दृश्य अब यहां आम हो चुका है।
बारिश की एक बूंद और बढ़ जाता है खतरा
मतकमा चौक रेलवे क्रासिंग के पास बनाया गया अस्थायी डायवर्जन लोगों की मजबूरी है। पुराना पुल तोड़कर नया पुल बनाया जा रहा है, इसलिए खेत के रास्ते से यह वैकल्पिक रास्ता निकाला गया है। इरादा अच्छा था कि लोगों की आवाजाही बनी रहे, लेकिन मिट्टी की यह सड़क हल्की बारिश में ही दलदल बन जा रही है। स्थानीय दुकानदार बताते हैं कि सोमवार रात की हल्की बारिश के बाद मंगलवार सुबह कई बाइक सवार गिर पड़े। किसी का हाथ छिल गया, किसी का घुटना जख्मी हो गया। कुछ लोग सीधे नाले में जा गिरे।

सब्जी लेकर बाजार जाने वालों की परेशानी
पास के गांवों के किसान रोज सुबह खेत से सब्जी लेकर भुरकुंडा बाजार जाते हैं। एक बुजुर्ग किसान ने बताया कि अब डर लगता है कि कहीं बाइक फिसल न जाए। अगर गाड़ी गिर गई तो सब्जी भी खराब और शरीर भी चोटिल। कई बार लोग पैदल सब्जी ढोकर मुख्य सड़क तक ले जाते हैं, फिर वहां से वाहन पकड़ते हैं। उनके लिए यह सिर्फ रास्ता नहीं, रोजी रोटी का जरिया है।
बच्चों की चिंता में डूबे अभिभावक
सबसे ज्यादा चिंता स्कूल जाने वाले बच्चों को लेकर है। सुबह के वक्त स्कूल वैन और बाइक से बच्चे इसी रास्ते से गुजरते हैं। अभिभावक कहते हैं कि हर दिन दिल धड़कता रहता है। कई माता पिता अब खुद बच्चों को पैदल मुख्य सड़क तक छोड़ने जा रहे हैं। एक मां ने कहा, पुल कब बनेगा पता नहीं, लेकिन तब तक अगर यही हाल रहा तो रोज किसी बड़े हादसे का डर बना रहेगा।

मदद के लिए आगे आते हैं ग्रामीण
जब भी कोई फिसलता है, आसपास के लोग दौड़कर मदद करते हैं। नाले में गिरे लोगों को बाहर निकालते हैं, बाइक उठाते हैं। गांव का यह साथ ही फिलहाल सबसे बड़ा सहारा है। लेकिन लोग मानते हैं कि सिर्फ आपसी मदद से समस्या का हल नहीं होगा।
राहत की उम्मीद, लेकिन इंतजार लंबा
झारखंड राज्य पथ निर्माण विभाग की ओर से पुल निर्माण का काम चल रहा है। लोगों को उम्मीद है कि पुल बन जाने के बाद यह परेशानी खत्म होगी। लेकिन तब तक डायवर्सन को मजबूत करने की मांग उठ रही है। ग्रामीण चाहते हैं कि मिट्टी की जगह गिट्टी या पत्थर डाला जाए ताकि बारिश में सड़क कीचड़ में न बदले।
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