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Ranchi : झारखंड के ऊर्जा निगमों में लंबे समय से बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक नहीं होने को लेकर अब मामला गरमा गया है। झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ ने इस पर खुलकर नाराजगी जताई है और कहा है कि अगर जल्द बैठक नहीं हुई तो संगठन आगे की रणनीति तय करेगा।
कई महीनों से नहीं हुई बैठक
संघ के अध्यक्ष अजय राय ने बताया कि झारखंड राज्य ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड और इसकी सहयोगी कंपनियों में 23 सितम्बर 2025 के बाद से अब तक कोई बोर्ड बैठक नहीं हुई है। ये कंपनियां हैं झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड, झारखंड ऊर्जा संचारण निगम लिमिटेड और झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड। उनका कहना है कि नियम के मुताबिक हर चार महीने में कम से कम एक बैठक होना जरूरी है। लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी बैठक नहीं होना चिंता की बात है।
फैसले अटके, कामकाज पर असर
अजय राय ने कहा कि बोर्ड बैठक नहीं होने की वजह से कई अहम प्रस्ताव फाइलों में ही पड़े हुए हैं। बिजली वितरण, ट्रांसमिशन और उत्पादन से जुड़े नीतिगत और वित्तीय फैसले नहीं हो पा रहे हैं। इसका सीधा असर कामकाज पर पड़ रहा है। संघ का कहना है कि जब तक बोर्ड बैठक नहीं होगी, तब तक बड़े फैसले नहीं लिए जा सकते। ऐसे में कर्मचारियों से लेकर उपभोक्ताओं तक सब पर असर पड़ सकता है।
जुर्माने का भी खतरा
संघ ने यह भी कहा कि कंपनी अधिनियम के तहत समय पर बैठक नहीं होने पर रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज की ओर से जुर्माना लगाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो निगम की छवि खराब होगी और भविष्य में लिए गए फैसलों पर भी सवाल उठ सकते हैं। अजय राय ने साफ कहा कि यह सिर्फ कर्मचारियों का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे बिजली तंत्र से जुड़ा मामला है। समय पर बैठक नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही को दिखाता है।
9 मार्च को बैठक कराने की मांग
श्रमिक संघ ने मांग की है कि 9 मार्च 2026 को प्रस्तावित बोर्ड बैठक हर हाल में कराई जाए। साथ ही जो मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, उन पर तुरंत फैसला लिया जाए। संघ ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कदम नहीं उठाया गया तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होगा। उनका कहना है कि बिजली व्यवस्था सुचारू रखने के लिए जरूरी है कि ऊर्जा निगमों में नियमित बैठकें हों और समय पर फैसले लिए जाएं।
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