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News Samvad : होली के बाद बिहार की महिलाओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों में सेविका और सहायिका के 20 हजार से अधिक पदों पर बहाली प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। समाज कल्याण विभाग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है और सभी जिलों को निर्देश भेज दिए गए हैं।
यह निर्णय खास तौर पर उन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो लंबे समय से नौकरी का इंतजार कर रही थीं।
राज्य में चल रहे हैं 1 लाख 14 हजार आंगनबाड़ी केंद्र
इस समय बिहार में करीब 1 लाख 14 हजार आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से बच्चों को पोषाहार, टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और प्रारंभिक शिक्षा जैसी जरूरी सेवाएं दी जाती हैं।
सरकार ने इसके साथ ही 18 हजार नए आंगनबाड़ी केंद्र खोलने का प्रस्ताव भी भेजा है। विभाग को उम्मीद है कि 31 मार्च तक इन नए केंद्रों को मंजूरी मिल जाएगी।
पहले चरण में 9 हजार नए केंद्रों पर होगी नियुक्ति
जैसे ही मंजूरी मिलेगी, पहले चरण में 9 हजार नए आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेविका और सहायिका की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
इन नए केंद्रों से उन इलाकों को राहत मिलेगी जहां अब तक केंद्रों की कमी थी और बच्चों व महिलाओं को काफी दूरी तय करनी पड़ती थी।
पुराने केंद्रों में भी 2200 से ज्यादा पद खाली
सिर्फ नए केंद्र ही नहीं, बल्कि पुराने आंगनबाड़ी केंद्रों में भी बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। जानकारी के अनुसार 2 हजार 200 से अधिक केंद्रों में सेविका और सहायिका के पद रिक्त हैं।
इन पदों के खाली रहने से पोषण वितरण और प्रारंभिक शिक्षा का काम प्रभावित हो रहा था। सरकार ने फैसला किया है कि 1 अप्रैल से इन पदों को भरने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी।
नए केंद्रों के लिए जगह चिन्हित करने का निर्देश
समाज कल्याण विभाग ने 10 मार्च से सभी सीडीपीओ को निर्देश दिया है कि वे नए आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए उपयुक्त स्थान की पहचान करें।
खास ध्यान उन क्षेत्रों पर दिया जा रहा है जहां एक ही इलाके में कई केंद्र पास पास चल रहे हैं या जहां केंद्र की कमी के कारण बच्चों को ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती है।
सरकार का उद्देश्य है कि हर जरूरतमंद इलाके में आंगनबाड़ी सुविधा उपलब्ध हो और कोई भी बच्चा पोषण और शिक्षा से वंचित न रहे।
31 मार्च के बाद तेज होगी बहाली प्रक्रिया
विभाग के अनुसार कागजी प्रक्रिया अंतिम चरण में है और 31 मार्च तक मंजूरी मिलने की संभावना है। इसके बाद पहले चरण में 9 हजार नए केंद्रों पर नियुक्ति शुरू होगी।
साथ ही 2 हजार 200 से अधिक पुराने केंद्रों के रिक्त पदों को भी भरा जाएगा। इससे केंद्रों का संचालन बेहतर होगा और बच्चों को नियमित सेवाएं मिल सकेंगी।
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