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Home » देश में पहली बार CEC को हटाने की मांग, संसद के दोनों सदनों में नोटिस जमा
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देश में पहली बार CEC को हटाने की मांग, संसद के दोनों सदनों में नोटिस जमा

March 13, 2026No Comments4 Mins Read
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New Delhi : देश की संसदीय राजनीति में एक असामान्य घटनाक्रम सामने आया है। विपक्षी दलों के सांसदों ने CEC यानी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग को लेकर संसद के दोनों सदनों में नोटिस जमा किया है। इस कदम के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, विपक्ष के करीब 193 सांसदों ने इस प्रस्ताव के समर्थन में हस्ताक्षर किए हैं। इनमें लोकसभा के लगभग 130 और राज्यसभा के 60 से अधिक सदस्य शामिल बताए जा रहे हैं। यह नोटिस संसद के नियमों के तहत पेश किया गया है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई है।

क्या है मामला

विपक्षी दलों का आरोप है कि हाल के समय में भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठे हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम करना चाहिए, लेकिन कुछ फैसलों को लेकर विपक्ष ने असंतोष जताया है। इसी को आधार बनाकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए यदि आयोग के कामकाज को लेकर संदेह पैदा होता है, तो संसद के माध्यम से उसकी समीक्षा होना जरूरी है।

आगे क्या होगा

संसद के नियमों के अनुसार, CEC को हटाने की प्रक्रिया काफी जटिल होती है। इसके लिए दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी होता है। जब तक दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित नहीं हो जाता, तब तक किसी भी मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से नहीं हटाया जा सकता। यदि सदन के सभापति या अध्यक्ष इस नोटिस को स्वीकार कर लेते हैं, तो आगे इस मामले पर चर्चा और जांच की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसके बाद ही यह तय होगा कि प्रस्ताव पर मतदान कराया जाएगा या नहीं।

सरकार और विपक्ष आमने-सामने

इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ने के आसार हैं। जहां विपक्ष इसे लोकतांत्रिक जवाबदेही का मामला बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि यह कदम राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है। फिलहाल, संसद में दिए गए इस नोटिस के बाद देश की राजनीतिक नजरें आगे की संसदीय प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद की कार्यवाही में प्रमुख रूप से उठ सकता है।

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की क्या है प्रक्रिया

CEC यानी मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया वही है जो सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए अपनाई जाती है। यानी यह एक तरह की महाभियोग जैसी प्रक्रिया होती है और इसे केवल दो आधारों पर ही लाया जा सकता है—सिद्ध कदाचार (Misconduct) या अक्षमता। सीईसी को हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है। इस प्रस्ताव के पारित होने के लिए विशेष बहुमत जरूरी होता है। यानी सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और मौजूद तथा मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई समर्थन जरूरी होता है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून के अनुसार, सीईसी को उसी तरीके और आधार पर हटाया जा सकता है जिस आधार पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है।

जांच समिति कैसे बनती है

न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत अगर संसद के दोनों सदनों में एक ही दिन प्रस्ताव की सूचना दी जाती है, तो पहले दोनों सदनों में प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति मिलकर एक जांच समिति का गठन करते हैं।

इस समिति में तीन सदस्य होते हैं

  • सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नामित कोई न्यायाधीश
  • किसी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
  • एक प्रतिष्ठित न्यायविद

यह समिति अदालत की तरह सुनवाई करती है। इसमें गवाहों से पूछताछ होती है और आरोपों की जांच की जाती है। मुख्य चुनाव आयुक्त को भी समिति के सामने अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाता है।

14 दिन बाद होती है चर्चा

यदि महाभियोग प्रस्ताव लाया जाता है, तो नोटिस सदन में पेश होने के 14 दिन बाद इस पर चर्चा होती है। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया बढ़ती है। अब देखना होगा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ यह प्रस्ताव मौजूदा सत्र में आगे बढ़ पाता है या नहीं। संसद का वर्तमान बजट सत्र 2 अप्रैल तक चलना है।

इसे भी पढ़ें : रोजी-रोटी की तलाश में निकला पांच बच्चों का पिता 42 रोज से लापता

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