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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ के मालपहाड़ी रोड पर हर सुबह एक अलग ही रौनक होती थी। सुबह होते ही लोग लाइन में लग जाते… कोई मजदूर, कोई बुजुर्ग, तो कोई रिक्शा चलाने वाला। सबकी उम्मीद एक ही… पांच रुपये में मिलने वाली गर्म दाल-भात की थाली। लेकिन इस सुबह नजारा बदला हुआ था। दरवाजे का ताला टूटा पड़ा था, अंदर बर्तन गायब थे, और अनाज का नामोनिशान नहीं। जैसे किसी ने सिर्फ सामान ही नहीं, बल्कि सैकड़ों लोगों की उम्मीदें भी चुरा ली हों।
“अब हम क्या खाएंगे?”
करीब 60 साल के रामू महतो, जो रोज यहां खाना खाते थे, टूटी चौखट को देखते हुए बस इतना ही कह पाए… “बाबू, अब हम क्या खाएंगे? यही सहारा था।” उनकी आवाज में गुस्सा कम, बेबसी ज्यादा थी। पास खड़ी एक महिला, जो घरों में काम करती है, बोली… “दिनभर मेहनत के बाद पांच रुपये में पेट भर जाता था। अब बाहर खाएंगे तो 30-40 रुपये लगेंगे… कैसे चलेगा?”
तीसरी बार टूटा केंद्र का ताला, हर बार टूटी उम्मीद
केंद्र की संचालिका टुकु सरकार के लिए यह सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि एक लगातार टूटता हौसला है। “ये तीसरी बार है… हर बार हम फिर से खड़े होने की कोशिश करते हैं, लेकिन अब तो लग रहा है कि कैसे चल पाएगा,” उन्होंने आंखों में नमी के साथ कहा। उनके मुताबिक, पहले भी लाखों रुपये का सामान चोरी हो चुका है। शिकायतें हुईं, कागज भरे गए, लेकिन हालात जस के तस हैं।
जर्जर इमारत, लापरवाही और बढ़ती चिंता
जिस भवन में यह केंद्र चलता है, उसकी हालत खुद एक कहानी कहती है… टूटी दीवारें, कमजोर दरवाजे और सुरक्षा का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं। टुकु सरकार बताती हैं, “कई बार प्रशासन को लिखा, कहा कि बिल्डिंग ठीक करा दीजिए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब देख लीजिए, नतीजा सामने है।”

300 पेटों की जिम्मेदारी अब अधर में
यह केंद्र रोज करीब 300 लोगों को खाना खिलाता था। ये सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि 300 कहानियां हैं। किसी की मजदूरी अनियमित है, कोई अकेला है, तो कोई इतना कमाता ही नहीं कि रोज भरपेट खाना खरीद सके। अब जब केंद्र बंद होने की कगार पर है, तो इन 300 लोगों के सामने सीधा सवाल खड़ा है… “आज खाना कहां से आएगा?”
लोगों का गुस्सा: “गरीबों का हक भी सुरक्षित नहीं”
घटना के बाद आसपास के लोग जुटे तो सिर्फ चोरी की बात नहीं हुई, बल्कि सिस्टम पर भी सवाल उठे। एक स्थानीय युवक ने कहा, “जहां गरीबों को खाना मिलता है, वहां भी चोरी हो रही है… और ये तीसरी बार है। इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा?”
पुलिस जुटी तफ्तीश में
पुलिस मौके पर पहुंची है और जांच शुरू कर दी गई है। लेकिन जिन लोगों का पेट इस केंद्र से भरता था, उनके लिए जांच से ज्यादा जरूरी है… केंद्र का फिर से खुलना।
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